वर्क वीजा खत्म: कैसे कमाए,कैसे वापस आए

वर्क वीजा खत्म: कैसे कमाए,कैसे वापस आए
वर्क वीजा खत्म: कैसे कमाए,कैसे वापस आए

Satyendra Porwal | Updated: 23 Aug 2019, 07:24:41 PM (IST) Chandigarh, Chandigarh, Punjab, India

गुरुदासपुर सांसद के पास परिजनों ने लगाई अर्जी । विदेश मंत्रालय से जारी कागजों को ही बता दिया फर्जी।
सन्नी देओल रोजाना कर रहे हैं कुवैत में फंसे चार युवकों से बात।

 

(गुरदासपुर.चंडीगढ़). कुवैत में फंसे गुरदासपुर के 4 नौजवान कुवैत से भारत वापसी ना होने के कारण इतना परेशान हो गए कि गुरदासपुर से (सांसद सनी देओल) की ओर से विदेश मंत्रालय से जारी करवाए गए कागजों को ही फर्जी कहने लगे हैं। हालांकि सांसद सनी रोज इन चारों युवकों से फोन पर बातचीत कर रहे हैं फिर भी उन्हें यकीन नहीं है कि एक सांसद की ओर से ( भारत सरकार विदेश मंत्रालय) से जारी किए गए पत्र जाली नहीं हैं।

दस महीनों से भीख मांगकर कर रहे गुजारा
पंजाब के जिला गुरदासपुर के चार युवक कुवैत में फंसे हैं। चारों युवकों ने गुरदासपुर से फिल्म अभिनेता (सांसद सनी देओल) से मदद की गुहार लगाई है। अक्टूबर 2018 में कुवैत गए युवकों का पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज वहां के स्थायी और मूलरूप से कश्मीरी ठेकेदार ने छीन लिए हैं। (वर्क परमिट) खत्म होने के कारण काम नहीं मिला। इसके कारण वे 10 महीनों से भीख मांगकर गुजारा कर रहे हैं। युवकों ने पहले सोशल मीडिया पर वतन वापसी के लिए केंद्र सरकार के दखल की मांग की। अब परिवार डीसी समेत नेताओं के चक्कर लगा रहा है।

पत्राचार भी हुआ, हल नहीं निकला
गांव मान नंगल निवासी सुखविंदर की पत्नी पूजा और माता कमलेश रानी ने बताया कि तीन महीने पहले उन्होंने सांसद सनी से बेटों की वतन वापसी की गुहार लगाई थी। कुछ पत्राचार भी हुआ पर कोई हल नहीं निकला। सुखविंदर ने फोन कर बताया कि वह और उनका भाई बलविंदर कुमार, जालंधर निवासी मनदीप, ब्यास निवासी बलजीत सिंह पिछले साल ठेकेदार के माध्यम से वर्क परमिट पर कुवैत के वफरा ब्लॉक नंबर-4 में आए थे। वहां उन्हें जम्मू-कश्मीर माझाकोट, रजौरी निवासी ठेकेदार मोहम्मद ताजुद्दीन मिला।

ठेकेदार ने काम से निकाला, वेतन भी नहीं दिया
उन्हें सरिया काटने और स्टील फीटर के काम में लगा दिया। जिस ठेकेदार के पास वह काम करते थे कुछ समय बाद ठेकेदार ने उन्हें काम से निकाल दिया और वेतन भी नहीं दिया। वर्क वीजा भी समाप्त हो चुका है। लिहाजा 10 माह से कोई भी काम नहीं मिला।

सनी रोज करते है युवकों से फोन पर बातचीत

गुरदासपुर से फिल्म अभिनेता (सांसद सनी देओल)

माता कमलेश ने बताया कि तीन महीने पहले (सांसद सनी देओल) ने आश्वासन दिया था । वहीं, सांसद सनी देओल के पीए गुरप्रीतसिंह ने बताया कि सनी इस मामले को लेकर काफी गंभीर हैं। वह रोज युवकों से फोन पर बातचीत करते हैं। भारत सरकार द्वारा कुवैत दूतावास से संपर्क कर उन्हें इन चारों युवकों के कागजात मुहैया करवा दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार विदेश मंत्रालय कोई फर्जी डॉक्यूमेंट जारी नहीं करती, आरोप बेबुनियाद हैं। इमिग्रेशन और वतन वापसी के लिए जो जरूरी नियम बने हैं उन्हें फॉलो करना पड़ेगा, जो कि सांसद सनी देओल कर रहे है।ं

फर्जी डॉक्यूमेंट देकर आश्वस्त किया था
उधर, कुवैत में बैठे सुखविंदर सिंह ने परिजन को बताया कि सनी ने वतन वापसी के लिए जो पत्र विदेश मंत्रालय को भेजा और विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आश्वस्त पत्र जो उन्हें मिला, वह उसे लेकर कुवैत स्थित भारतीय दूतावास गए थे। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह का कोई पत्र नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उन्हें फर्जी डॉक्यूमेंट देकर आश्वस्त किया गया था।

सवाल जो मांग रहे जवाब...ये कैसा वीजा, वापसी में संकट...

अन्तरराष्ट्रीय आवागमन में यूं तो नियम कायदे बड़े सख्त दिखाई देते हैं, लेकिन ग्लोबल रूप से अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो आए दिन यह खबर आती है कि वीजा की परेशानी से यात्री को एक देश से दूसरे देश में वापस जाने मेंं परेशानी खड़ी हो गई है। बिना पासपोर्ट-वीजा किसी देश में प्रवेश आसान नहीं है, लेकिन किसी भी देश में प्रवेश के बाद यात्री वापस कब जाएगा, यह हाल पूछने के लिए कोई ठोस रणनीति अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर नजर नहीं आती है।
वीजा की परेशानी में कई बार बाहर गए लोगों को वतन वापसी में संकट का सामना करना पड़ता है। बाहरी देशों में ट्यूरिस्ट परमिट या वर्क परमिट सहित और भी अन्य तरह से नियम कायदे अनुसार वीजा की अनुमति मिलती है। अब सवाल यह है कि देश के बाहर जब वीजा की वैद्यता समाप्त होने लगती है तो सम्बन्धित जिम्मेदार दूतावास, एयरपोर्ट एथोरिटी, संस्था या अधिकारी ऐसे मामले की स्वप्रेरणा से पड़ताल क्यो नहीं करते कि जो हमारे देश में आया है क्या वापस भी लौटा है या नहीं।
आईटी के युग में इस तरह का अभी तक किसी ने ऐसा कोई नेटवर्क या सोफ्टवेयर नहीं बनाया है कि किस देश में कौन आ रहा है और आने के बाद तय सीमा होने के बाद क्या वह वापस स्वदेश लौट गया। इसके लिए कोई साइट भी प्रमुखता से नजर नहीं आती है। ऐसे में विश्व भर में आए दिन ऐसी समस्या तब ही सामने आती है,जब किसी का परिजन विदेश से स्वदेश समय पर नहीं लौटता है और उसकी खैर-खबर सम्बन्धित परिजन तक नहीं पहुंचने पर वे सक्रिय होते हैं या विदेश से कोई यात्री स्वदेश आना चाहता है, लेकिन उसके पासपोर्ट व वीजा उसके काम करने वाले मालिक के पास होते है और वह उन्हें राजी-राजी लौटाना नहीं चाहता है। ऐसे में जब यात्री को मौका मिलता है तो मामला पुलिस, दूतावास या एयरपोर्ट अधिकारियों के पास पहुंचता है।
इस पूरे नेटवर्क में ट्रेवल एजेन्ट से लेकर दूतावास व एयर एथोरिटी तक इस बात पर अभी तक मंथन कोई क्रियान्विति के रूप में नजर नहीं आया। तकनीकी के इस युग में अब इसकी सख्त जरूरत है ताकि किसी के परिजन मुसीबत में ना पड़े।

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