स्वास्थ्य मंत्री की स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक

जब किसी व्यक्ति के कोरोना से संक्रमित होने का संदेह होता है, तो उसके लिए उठाये जाने वाले कदम मजबूत करने की आवश्यकता होती है। इसलिए स्थानीय प्रोटोकॉल विकसित करें और प्रत्येक घर में जाने पर घर के एसवीपी को सूचित करें।

By: Dhannalal Sharma

Published: 24 Jun 2020, 07:28 PM IST

नेल्लोर. आंध्र प्रदेश में बढ़ती कोरोना संक्रमितों की संख्या को लेकर सोमवार को कैंप कार्यालय में स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों से प्रदेश के जिलों में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण और उसके निवारण के लिए उठाये जा रहे कदमों की जानकारी ली और अधिकारियों को प्रत्येक परिवार के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया। बैठक में मंत्री अल्ला नानी, सीएस नीलम साहनी, डीजीपी गौतम सवांग, चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्रालय के मुख्य सचिव जवाहर रेड्डी और नोडल अधिकारी कृष्णबाबू भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने 90 दिनों के भीतर व्यापक स्क्रीनिंग का आदेश दिया। साथ ही उन्होंने वाहन चालकों का ब्लड सैम्पल लेकर शुगर और बीपी का परीक्षण वहीं करने के बाद दवाई भी दी जाए और जिनको जरुरत हो उनको पीएचसी में रैफर करने को कहा। 104 स्टाफ सदस्यों के साथ एएनएम, आशावादी और स्वयंसेवक हर 104 दिनमें गांवों से जुड़ते हैं। मंत्री ने कहा कि चल रहे कोविड-१९ परीक्षणों में तर्कसंगत और ठोस रणनीति का पालन किया जाना चाहिए।

निर्धारित प्रक्रिया को मजबूत करना जरूरी
कंटेनमेंट जोन का 50 प्रतिशत और बाकी का 50 प्रतिशत परीक्षण किया जाना चाहिए। कुछ परीक्षण से सेल्फ रिपोर्टिंग के लिए आरक्षित होने चाहिए। फोन पर समाचार देने वालों का भी कोविड परीक्षण किया जाना चाहिए। जब किसी व्यक्ति के कोरोना से संक्रमित होने का संदेह होता है, तो उसके लिए उठाये जाने वाले कदम मजबूत करने की आवश्यकता होती है। इसलिए स्थानीय प्रोटोकॉल विकसित करें और प्रत्येक घर में जाने पर घर के एसवीपी को सूचित करें।

हर घर को जागृत करने की जरूरत
अगले 90 दिनों में हर घर में परीक्षण होना चाहिए। प्रत्येक पीएचडी में एक कोरोना नमूना संग्रह केंद्र होना चाहिए। प्रत्येक ग्राम सचिवालय को एक होर्डिंग लगाना चाहिए जिस पर कोरोना वायरस सम्बंधी जानकारी उपलब्ध हो और साथ ही फोन नंबर जो भी संपर्क में हो और परीक्षा के लिए कहां जाना है, इस का न्यूनतम विवरण शामिल होना चाहिए। उप-केंद्रों के बाद प्रत्येक गांव में चिकित्सा सेवाएं और शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या पर ध्यान देने के साथ ही शहरी स्वास्थ्य केंद्रों की योजना बनाई जानी चाहिए। शहरी क्षेत्रों में कोविद की रोकथाम के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की जानी चाहिए। शहरी क्षेत्रों की आबादी के आधार पर सीएमसी ने कहा कि जहां आवश्यक हो, शहरी स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया जाना चाहिए।

Dhannalal Sharma Desk
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