विदेश जाने वाले छात्र और पेशेवरों को कोविशल्ड की दूसरी डोज के लिए करनी पड रही जद्दोजहद

कोवैक्सीन गल्फ कंट्री में नहीं है मान्य

By: PURUSHOTTAM REDDY

Published: 15 Jun 2021, 03:35 PM IST

चेन्नई.

कोरोना रोधी वैक्सीन कोविशील्ड की दूसरी डोज 84 दिन बाद लगवाने का नियम है, लेकिन विदेश जाने वाले छात्रों और पेशेवरों को बड़ी राहत देते हुए स्वास्थ्य विभाग ने राहत दे दी है। वे 28वें दिन दूसरी डोज लगवा सकते हैं। इसके बावजूद तमिलनाडु में कोविशील्ड की पहली डोज लेने वाले कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, दूसरी डोज लेने के लिए लोग वैक्सीनेशन सेंटर पहुंच रहे है, क्योंकि कोविन पोर्टल पर अब भी 84 दिन के समय सीमा में बदलाव नहीं किए गए है। नियमों के अनुसार विदेश जाने वाले छात्र या पेशेवरों को यात्रा की पूरी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी। विभाग उसे पोर्टल पर अपलोड करेगा, उसके बाद ही दूसरी डोज लगाई जाएगी।

कोविन पोर्टल में जरूरी बदलाव नहीं होने से विदेश जाने वाले लोगों को कोविशील्ड की दूसरी डोज नहीं लग पा रही है। कई लोग दावा करते हैं कि कोविन पोर्टल वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र बनाता है, जो किसी को निर्धारित 84-दिन के अंतराल से पहले दूसरी खुराक लेने की अनुमति नहीं देता है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने पिछले सप्ताह स्वास्थ्य सचिवों को लिखे पत्र में कहा था कि राज्य सरकारों को ऐसे मामलों में अनुमति देने के लिए प्रत्येक जिले में एक सक्षम प्राधिकारी नामित करना चाहिए। सक्षम प्राधिकारी (जिलों में) लाभार्थी के पासपोर्ट नम्बर के साथ टीकाकरण प्रमाण पत्र को जोडऩे वाला एक और प्रमाण पत्र जारी कर सकता है।

सऊदी अरब में काम करने वाले जहाज-मरम्मत इंजीनियर धीवेंद्रन (51) ने 9 अप्रैल को कोविशील्ड की पहली खुराक ली, और 67 दिनों के बाद दूसरी खुराक के लिए चले गए, लेकिन उन्हें वापस लौटा दिया गया। उनसे कहा गया कि कोविन पोर्टल में केंद्र सरकार द्वारा घोषित असाधारण मामलों के लिए प्रविष्टियां करने की कोई सुविधा नहीं है।

तंजावुर के 25 वर्षीय इंजीनियर रामा श्रीनिवासन को पढाई के लिए कनाडा जाना है लेकिन उन्हें कोविशील्ड की दूसरी डोज नहीं दी जा रही है। उसने 10 मई को तिरुचि के एक निजी अस्पताल में पहली खुराक ली, और दूसरी डोज के लिए तंजावुर के कई वैक्सीनेशन सेंटर के चक्कर काट रहा है। उससे कहा जा रहा है कि कोविन पोर्टल पर ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

एक वैक्सीनेशन सेंटर के डेटा एंट्री स्टाफ ने पुष्टि की कि कोविन पोर्टल में इन असाधारण लाभार्थियों को समायोजित करने की कोई सुविधा नहीं है। अगर कोई मैन्युअल पंजीकरण के माध्यम से वैक्सीन दिया जाता है, तो भी लाभार्थी वैक्सीन प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं कर पाएगा।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव डॉ जे राधाकृष्णन ने कहा कि राज्य सरकार बार-बार जोर दे रही है कि केंद्र कोविन पोर्टल को खत्म करें। इस विशिष्ट मुद्दे को केंद्र के तत्काल संज्ञान में लाया जाएगा। इसके अलावा राज्य सरकार भी एक या दो दिन में समस्या को हल करने के लिए अन्य राज्यों के परामर्श से विकल्पों पर विचार करेगी।

कोविड टीकाकरण की जब शुरुआत हुई तो कोविशील्ड की दूसरी डोज 28वें दिन दी जाती थी। इसके बाद 46 दिन और फिर 84 दिन का मानक तय किर दिया गया। कोवैक्सीन का मानक पहले की भांति आज भी 28 दिन ही है। लेकिन गल्फ कंट्री में कोवैक्सीन मान्य नहीं है। इसलिए वहां जाने वालों को कोविशील्ड ही लगवानी है। 84 दिन का समय उनके लिए मुश्किल खड़ा कर रहा था, इसलिए उन्हें राहत देते हुए 28 दिन का मानक तय कर दिया गया है।


कोवैक्सीन गल्फ कंट्री में नहीं है मान्य
कोवैक्सीन का टीका लगवाने वाले लोग अगर गल्फ कंट्री जाना चाहते हैं, तो वह नहीं जा सकते हैं। गल्फ कंट्री में कोवैक्सीन टीके को मान्यता नहीं दी गई है। ऐसे में विदेश जाने वाले लोग केवल कोविशील्ड टीका लगवा रहे हैं।

PURUSHOTTAM REDDY
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