मद्रास हाईकोर्ट एसपी वेलुमणि को डीवीएसी की क्लीन चिट स्वीकार करने के संबंध में करेगा फैसला

मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि यह पता चलने पर कि दिन को रात में कदल दिया गया है तो वह सतर्कता और

By: Vishal Kesharwani

Updated: 21 Jun 2021, 05:33 PM IST


चेन्नई. मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि यह पता चलने पर कि दिन को रात में कदल दिया गया है तो वह सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) द्वारा पूर्व स्थानीय प्रशासन मंत्री एसपी वेलुमणि को क्लीन चिट देने की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं कर सकता है। मुख्य न्यायाधीश संजीव बैनर्जी और न्यायाधीश सेंथिलकुमार रामामूर्ति की पहली बेंच ने कहा कि कठोर आरोपों में कार्रवाई की मांग करने पर कोर्ट हस्तक्षेप करेगा। यदि केवल छोटी छोटी बातें हैं, तो उसमें कोर्ट का हित नहीं है।

 

न्यायाधीशों ने कहा कि अगर सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया है तो कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगी। लेकिन अगर दिन को रात में बदल दिया गया है तो कोर्ट इसे स्वीकार भी नहीं करेगी। अदालत ने पूर्व मंत्री का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी की दलीलों पर जवाब देते हुए यह टिप्पणी की कि एक बार राज्य सरकार ने डीवीएसी की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया तो उसमें कुछ नहीं बचा है। बेंच ने कहा सरकार ने इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है, लेकिन सायद कोर्ट इसे स्वीकार ना करती।

 

यह मामला एनजीओ अर्रापोर इय्याक्कम द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। अपनी याचिका में याचि ने चेन्नई और कोयम्बत्तूर निगमों की निविदाओं के आवंटन में भ्रष्टाचार के लिए वेलुमणि के खिलाफ एक विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर जांच का आदेश देने की मांग की थी। इससे पहले याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता वी. सुरेश ने बताया कि याचिकाकर्ता ने डीवीएसी रिपोर्ट के खिलाफ कई काउंटर दायर किए हैं। चूंकि वह एक भौतिक सुनवाई में अपनी बात रखना चाहता था, इसलिए कोर्ट ने चार सप्ताह के लिए मामले को स्थगित कर दिया।

Vishal Kesharwani
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