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दुनिया को भारत की देन का होगा गहन अध्ययन

-आईआईटी मद्रास ने भारतीय ज्ञान व्यवस्था केंद्र की शुरुआत की

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दुनिया को भारत की देन का होगा गहन अध्ययन

दुनिया को भारत की देन का होगा गहन अध्ययन

चेन्नई.
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के मानविकी और समाज विज्ञान विभाग ने भारतीय ज्ञान व्यवस्था केंद्र का शुभारंभ किया है। इसका उद्घाटन भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर), नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, नई दिल्ली के महानिदेशक श्री कुमार तुहिन ने किया।
डॉ विनय सहस्रबुद्धे, अध्यक्ष, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए इसे अत्यावश्यक बताया कि हम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, वास्तुकला, भाषा विज्ञान, कला, संस्कृति, अर्थशास्त्र और राजनीति, ऐसे अन्य क्षेत्रों में दुनिया को भारत की देन का गहन अध्ययन करें और इससे प्राप्त निष्कर्षों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाएं।
केंद्र के प्रधान अन्वेषक डॉ. आदित्य कोलाचना हैं। इस अवसर पर आईसीसीआर के महानिदेशक श्री कुमार तुहिन ने सीआईकेएस, आईआईटी मद्रास और आईसीसीआर के इस करार को अहम बताते हुए कहा कि इससे भारत की समृद्ध विरासत और संस्कृति के बारे में विदेशों में जागरूकता बढ़ेगी। आईसीसीआर और आईआईटी मद्रास के इस सहयोग करार पर श्री कुमार तुहिन और प्रो. रघुनाथन रंगास्वामी ने हस्ताक्षर किए।
प्रो. रघुनाथन रेंगास्वामी, डीन (वैश्विक संबंध), आईआईटी मद्रास ने भारतीय ज्ञान व्यवस्था के गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के लिए इस केंद्र का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने बताया कि विदेशी छात्रों को भारत में अध्ययन का अनुकूल परिवेश देने और भारत के विभिन्न कैम्पस को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने में इस केंद्र की भूमिका अहम होगी।


यह केंद्र चार विशेष विषयों पर ध्यान केंद्रित करेगा
1. भारत में गणित और खगोल विज्ञान,
2. वास्तुकला अभियांत्रिकी, वास्तु और शिल्प-शास्त्र,
3. भारतीय राजनीतिक और आर्थिक विचार,
4. भारतीय सौंदर्यशास्त्र और व्याकरण परंपराएं