#karmavir_awards : कोरोना लॉकडाउन -बुजुर्गो तक कुछ इस तरह पहुंचा रहे राहत सामग्री

-दो लोगोंं के लिए सात दिन की देते हैं सामग्री
-बेजुबान जानवरोंं के लिए भी कर रहे सहयोग

By: Vishal Kesharwani

Published: 09 Apr 2020, 07:14 PM IST

चेन्नई. कोरोना वायरस के प्रसार में तेजी से हो रही वृद्धि को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार द्वारा 21 दिनों का लॉकडाउन किया गया है जो कि जारी है। लॉकडाउन के दौरान भी सब्जी और किराना समेत अन्य सभी आवश्यक वस्तुएं मार्केट में मिल रही हैं। कुछ निर्धारित जगह हैं जहां पर सारी आवश्यक वस्तुएं मिल रही हैं। जो युवा वर्ग के लोग हैं वे सामान खरीदारी के लिए लंबी दूरी तय कर लाइन लगाकर भी खरीद ले रहे हैंं। ऐसे में कुछ ऐसे भी वरिष्ठ नागरिक हैं जो ज्यादा दूर का सफर करने में असमर्थ हो रहे हैं और उन तक सामग्री नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे लोगों की मदद की मइलापुर स्थित एमसीटीएम इंटरनेशनल स्कूल के 11वीं कक्षा के विद्यार्थी आर्नव राठौड़ ने बीड़ा उठाया है। जो कुछ लोगों के साथ मिलकर पिछले दस दिनों से वरिष्ठ नागरिकों तक जरूरी चीजें उपलब्ध कराने का काम कर रहे हैं। इसके लिए उन लोगों ने मोबाइल नंबर जारी किया है। सोशल मीडिया की सहायता से उस नंबर पर काफी लोगों का कॉल भी आ रहे है। इसकी शुरुआत इन लोगों ने सबसे पहले मइलापुर और आरए पुरम से की थी जहां पर वरिष्ठ नागरिकों में जरुरी खाद्य सामग्री का वितरण किया जा रहा था। लेकिन अब किलपॉक, अयनावरम, रायपेट्टा, एगमोर, नुंगमबाक्कम, ट्रिप्लीकेन, तेनामपेट, इंदिरा नगर, अन्ना नगर और कोरात्तूर जैसे इलाकों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों की सेवा में लगे हैं। अब तक इसके माध्यम में 250 खाद्य पैकेट का वितरण किया जा चुका है। इस दौरान ये लोग स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के तहत हाथ धोना, सोशल डिस्टेंस बनाए रखना और मास्क पहनने का भी पालन कर रहे हैं। पत्रिका से बातचीत के दौरान आर्नव ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से युवा लोगों को ही पर्याप्त मात्रा में सामान नहीं मिल पा रहा है तो बुजुर्ग लोगों को कहां से मिलेगा। उनकी इस समस्याओं को देखते हुए मैने अपने परिवार के सहयोग से बुजुर्गाे में मुफ्त में राशन वितरण की प्रक्रिया शुरू की। राशन के पैकेट में दाल, चावल, नमक, चीनी और तेल समेत अन्य खाद्य सामग्री होते हैं जो कि दो लोगोंं के लिए सात दिन तक के लिए होता है। इसके लिए पुलिस अधिकारियों द्वारा हमे अनुमति मिली है इसलिए हम कार में तीन लोग जाते हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हम किसी से मिलते नहीं बल्कि सामान लेकर जाते हैं और दरवाजे के पास छोड़ वहां से चले आते हैं और बाद में कॉल कर जानकारी दे देते हैं। इस कार्य को सफल बनाने मेंं मेरी मां शिल्पम कपूर के नेतृत्व वाली अरन्या नामक एक फाउंडेशन का भी काफी सहयोग मिल रहा है। काफी लोगों द्वारा सहयोग दिया जा रहा है। इतना ही नहीं बल्कि हमारे कार्याे से खुश होकर डॉबर कंपनी ने 75 हजार लिटर पैकेट वाला ज्यूस का बक्सा प्रदान किया है जो कि पुलिसकर्मियों में वितरित किया जा रहा है। पुलिस आयुक्त एके विश्वनाथन की उपस्थिति में पुलिसकर्मियों में ज्यूस के वितरण की शुरूआत हुई थी। उन्होंने कहा कि ब्लू क्रॉस नामक एक एनजीओ, जो कि जानवरों को खाना देती है, ने भी हमसे सहयोग मांगा था तो उन लोगों को 500 किलो दाल और 25 किलो घी प्रदान किया गया है। स्थिति नाजुक है और हम चाहते हैं कि कोई भी बुजुर्ग बिना खाए ना सोए। इसमें कई सारे वालंटियर शामिल हैं जो दिन रात अपना सहयोग प्रदान कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि इस महामारी के समय में ज्यादा से ज्यादा बुजुर्गो की मदद कर सकें।

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