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छतरपुर

कचरा, नाली का पानी और जलकुंभी से दम तोड़ रहे शहर के प्राचीन तालाब

शहर के अधिकांश तालाब अतिक्रमण का शिकार हैं। उनको मिट्टी कूड़ा-कचरा आदि डालकर भरा जा रहा है। कई तालाब जलकुंभी का शिकार बन गए हैं। तालाबों में पानी आने के प्राकृतिक रास्ते अवरुद्ध कर दिए गए हैं, जिससे उनमें बारिश का पानी संग्रहित नहीं हो पा रहा है।

छतरपुरJul 05, 2024 / 04:57 pm

Rizwan ansari

घास का मैदान नजर आ रही सांतरी तलैया

घास का मैदान नजर आ रही सांतरी तलैया

योजना बनी लेकिन पहले आचार संहिता अब बारिश के कारण नहीं हो पाएगा जीर्णोद्धार

छतरपुर. शहर के अधिकांश तालाब अतिक्रमण का शिकार हैं। उनको मिट्टी कूड़ा-कचरा आदि डालकर भरा जा रहा है। कई तालाब जलकुंभी का शिकार बन गए हैं। तालाबों में पानी आने के प्राकृतिक रास्ते अवरुद्ध कर दिए गए हैं, जिससे उनमें बारिश का पानी संग्रहित नहीं हो पा रहा है। तालाबों में प्राकृतिक तरीके से पानी के आने के रास्ते बंद होने व उसमें कचरा डाले जाने और नियमित सफाई व्यवस्था नहीं होने से तालाब अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहे हैं। इस साल तालाबों के जीर्णोद्धार की योजना बनी लेकिन आचार संहिता के चलते काम शुरू नहीं हो सका, फिर बारिश आ जाने के कारण अब काम नहीं हो पाएगा। अब जीर्णोद्धार की योजना पर अलगे साल गर्मियों में ही काम हो पाएगा।
एक साल पहले साल में श्रमदान व खर्च दोनो हुए
दूसरी ओर नगर पालिका ने बीते एक साल के दौरान शहर के ग्वाल मंगरा तालाब, संकट मोचन तालाब, सांतरी तलैया से जलकुंभी हटाने के नाम पर 6.65 लाख रुपए निकाल लिए हैं। इतनी राशि खर्च होने और समाजसेवियों के श्रमदान के बावजूद यह तीनों तालाब अब भी से जलकुंभी की चपेट में हैं। तालाब घास का मैदान नजर आ रहे है। ग्वाल मंगरा तालाब, संकट मोचन तालाब, सांतरी तलैया के साथ ही शहर में किशोर सागर तालाब, महोब्रा रोड की विंध्यवासिनी तलैया में भी गंदगी के साथ जलकुंभी फैलती जा रही है। जबकि जलकुंभी की सफाई के नाम पर सबसे अधिक 4.86 लाख रुपए ग्वाल मंगरा तालाब में खर्च किए गए हैं। इतनी अधिक राशि खर्च करने के बावजूद यह तालाब पूरी तरह से जलकुंभी की चपेट में है। इसी प्रकार से सांतरी तलैया में एक लाख रुपए और संकट मोचन तालाब में 78 हजार 432 रुपए खर्च किए गए हैं।
ग्वालमंगरा तालाब की हालत खराब
ग्वालमंगरा तालाब के मूल रकवे पर अतिक्रमण कर लगातार कब्जा हो रहा है। हर वर्ष तालाब न सिर्फ सिकुड़ रहा है बल्कि तालाब में गंदे पानी के नए स्त्रोत भी छोड़े जा रहे हैं। ग्वाल मंगरा तालाब में प्लास्टिक, पॉलीथिन एवं अन्य कचरा इतनी मात्रा में फेंका जा रहा है कि घाटों के समीप पानी ही नजर नहीं आता। पूरे तालाब में जलकुंभी के कारण हरी चादर दिखाई देती है। यही हालात संकट मोचन तालाब के हैं जहां गंदी नालियां तालाब में छोड़ी गई हैं। तालाब गंदगी और जलकुंभी से पट गया है।
गायत्री तलैया में बस स्टैंड का गंदा पानी
जवाहर रोड स्थित गायत्री मंदिर तलैया में दोनों बस स्टैंड सहित नौगांव रोड, फव्वारा चौक और दूध नाथ कॉलोनी के घरों का गंदा पानी आता है। पूरी तलैया का पानी गंध मारता है। इस तलैया में जल कुंभी का घेरा होने से घांस का मैदान जैसा लगने लगा है। लोगों ने नगर पालिका प्रशासन को इसकी कई बार शिकायत की है पर कार्रवाई नहीं हुई।

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