बिना मुआवजा के तोड़ दिए गरीबों के घर, पंचायत भवन में रहने को मजबूर हैं गरीब

शिकायतों का नहीं किया निराकरण

 

छतरपुर. झांसी-खजुराहो फोरलेन निर्माण के माध्यम से एक ओर जहां क्षेत्र के विकास की नई उम्मीद नजर आ रही है तो वहीं दूसरी ओर इस फोरलेन के निर्माण में एनएचएआई और प्रशासन के द्वारा बरती जा रही लापरवाही कई गरीब परिवारों के लिए मुसीबत बन गई है।
बमीठा क्षेत्र के ग्राम घूरा के लगभग आधा दर्जन गरीब परिवारों को महामारी और बारिश के बीच बिना मुआवजा दिए उनके घरों से बेघर कर दिया गया है। सड़क निर्माण के लिए इनके घरों को तोड़ दिया गया जिससे ये परिवार अब गांव के पंचायत भवन में रहने को मजबूर हैं। इसके पहले भी नौगांव, छतरपुर तहसील इलाके में मुआवजा वितरण को लेकर ग्रामीण गड़बड़ी की शिकायत करते रहे हैं। लेकिन प्रशासन ने मुआवजा को लेकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किए बिना मकान-दुकान तोड़ दी, जमीन लेकर फोरलेन का काम शुरु करा दिया।
ग्राम घूरा के पंचायत भवन में रह रहे विनोद रैकवार ने बताया कि उनका एक पैतृक मकान श्यामबाई के नाम से गांव में ही था। 15 दिन पहले समाचार पत्र में एक नोटिस छापा गया और पांच दिन पहले उनके मकान को तोड़ दिया गया। मकान का मुआवजा देने के लिए एनएचएआई ने दो साल पहले अवार्ड बनाया था लेकिन आज तक उनके खाते में एक पैसा भी नहीं आया, जबकि उन्हें पांच लाख 60 हजार रूपए दिए जाने थे। महामारी और बारिश के बीच अब जवान बच्चियों वाला विनोद रैकवार का पूरा परिवार पंचायत भवन में रहने को मजबूर है। गांव के चार-पांच अन्य परिवार भी इसी तरह की शिकायत कर रहे हैं।
लॉकडाउन में पैदल चलकर घर पहुंचे, अब प्रशासन ने जमींदोज कर दिए आशियाने
कोरोना महामारी के कारण देश के मजदूरों और गरीबों ने सबसे ज्यादा तकलीफ सही है। कई मजदूर विभिन्न महानगरों में अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए गए थे, लेकिन उन्हें लंबे लॉकडाउन के कारण पैदल ही अपने घरों की तरफ लौटना पड़ा। पांव में छाले और पस्त हौसलों के साथ अपने गांव-घर लौटे तो उनके पास एक ही सहारा उनका पैत्रिक घर था। जहां आने के बाद उन्हें वैश्विक महामारी के चलते लॉकडाउन की मार से राहत मिली। फोरलेन निर्माण में ऐसे कई गांव शामिल हैं जहां बड़ी संख्या में मजदूर अपने घरों की तरफ लौटे लेकिन जैसे ही वे घरों तक आए फोरलेन निर्माण कर रही पीएनसी कंपनी कई मजदूरों के घरों को तोड़ चुकी है। ऐसे दर्जनों परिवार हैं जिन्हें बगैर मुआवजा दिए ही बारिश के मौसम में घरों से बेदखल कर दिया गया।
ग्रामीण मुआवजा को लेकर लगाते रहे है आरोप, फिर भी नहीं हुई सुनवाई
फोरलेन के लिए दो साल पहले जमीन अधिग्रहण का अवॉर्ड पारित किया गया था। लेकिन नौगांव तहसील के दौरिया, पुतरया गांव में मुआवजा वितरण की समस्या को लेकर 2 साल तक किसानों को मशक्कत करनी पड़ी। किसानों ने मुआवजा वितरण में गड़बड़ी की शिकायत पर सुनवाई न होने पर कई बार धरना-प्रदर्शन भी किया। दो साल बाद जब प्रशासन ने इनके घरों को तोड़ा तब भी लोग मुआवजा में विसंगति का हवाला देकर विरोध करते रहे। प्रशासन ने दो साल तक हर बार जल्द की समस्या का निराकरण का आश्वासन दिया, लेकिन मुआवजा को लेकर ग्रामीणों का असंतोष दूर नहीं किया गया। इसी तरह छतरपुर जिला मुख्यालय के पास चंद्रपुरा गांव में फोरलेन निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन के मुआवजा वितरण को लेकर ग्रामीण बार-बार काम रुकवा दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि किसी को आधा तो किसी को बिना मुआवजा दिए फोरलेन निर्माण का कार्य कैसे कराया जा सकता है। यहां भी अधिकारी मुआवजा वितरण की गड़बड़ी सुलझाने की बात कह रहे हैं, लेकिन उसके पहले काम शुरु करने की शर्त भी रखते हैं। ग्रामीण मुआवजा वितरण की गड़बड़ी को सुलझाने बिना जमीन देने को तैयार नहीं है। कई स्थानों पर प्रशासन ने पुलिस बल के जरिए ग्रामीणों को हटाकर काम शुरु कराया, लेकिन जिन ग्रामीणों की जमीन ली जा रही है, उनकी समस्या का समाधान बाद के लिए टाल दिया जा रहा है।

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हामिद खान Desk
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