msp:95 हजार किसान पोर्टल पर चढ़े सिर्फ 3 हजार

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Sandeep Chawrey | Updated: 11 Oct 2019, 12:01:59 PM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

समर्थन मूल्य पर अनाज बेचने पंजीयन रिन्यूअल कराने नहीं पहुंच रहे किसान

छिंदवाड़ा. खरीफ की फसलों को सरकार एक निश्चित मूल्य पर किसानों से हर वर्ष ख्ररीदती है। समर्थन मूल्य की इस खरीदी इस बार भी होनी है। इसके लिए लिए किसानों को पंजीयन भी कराना पड़ता है। पुराना पंजीयन हो तो उसका नवीनीकरण भी कराना होता है लेकिन इस बार देर से घोषित हुई तारीख और प्रचार के अभाव के कारण किसान इसके लिए भी समिति कार्यालयों तक नहीं पहुंचे हैं। हर बार कम से कम एक महीने का समय दिया जाता है। इस बार सरकार ने ३ अक्टूबर से मक्का जैसी प्रमुख और ज्यादा उत्पादन देने वाली फसल का पंजीयन शुरू किया है।23 अक्टूबर तक पंजीयन होने हैं यानि किसानों को सिर्फ 20 दिन मिले हैं। पूरे जिले में गुरुवार तक मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ 2 हजार 998 पंजीयन हुए हैं। इसमें कुछ नए पंजीयन और कुछ नवीनीकरण वाले हैं। 20 दिन में कैसे होगा 90 हजार से ज्यादा का नवीनीकरण समर्थन मूल्य के अभियान में पंजीयन के लिए अब सिर्फ 20 दिन शेष बचे हैं और इस दौरान 90 हजार से ज्यादा किसानों के नवीनीकरण कैसे होगा यह चुनौती सहकारी समितियों के कार्यालयों में होगी। ध्यान रहे पिछले साल खरीफ में मक्का बेचने के लिए 90 हजार से ज्यादा किसानो ंने पंजीयन कराया था। इन्हें नए सिरे से तो नहीं लेकिन नवीनीकरण कराने तो पहुंचना ही होगा। गुरुवार को समितियो ंमें सर्वर की समस्या भी दिखी। कुछ समितियां तो एेसी है जहां इस मौसम में 800 से 900 पंजीयन किसान कराते थे इस साल अब तक 15 से 20 किसान ही यहां पहुंचे है।
किसान भी नहीं ले रहे रुचि
समितियों के कर्मचारियों की मानें तो इस बार समर्थन मूल्य पर खरीदी को लेकर किसानों में संशय की स्थिति देखी जा रही है। सरकार ने पहले धान, ज्वार बाजरा के पंजीयन की घोषणा की। मक्का की हुई नहीं। तीन तारीख को मक्का पंजीयन के पत्र जारी हुए। ये सूचना पूरे किसानों तक पहुंची ही नहीं। दूसरा किसान इस बार रुचि लेते भी नहंी दिख रहे। पिछले साल में सरकार को गेहूं किसानों ने बेचा था। उसकी प्रोत्साहन राशि अभी तक किसानों को मिली नहीं है। ऋण माफी योजना में भी अभी कई किसानां को लाभ नहीं मिल सका है। मक्का किस मूल्य पर इस बार सरकार ने यह भी तय नहीं किया है। कुल मिलाकर किसानों में उहापोह की स्थिति है।

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