भालू, भेडिय़ा और लोमड़ी की हुई गिनती

भालू, भेडिय़ा और लोमड़ी की हुई गिनती

Mantosh Kumar Singh | Publish: Mar, 15 2018 12:01:06 AM (IST) Chhindwara, Madhya Pradesh, India

9 मार्च से 11 मार्च तक चली वन्यप्राणी बाघ-तेंदुआ गणना के अंतर्गत 31 बीटों में 6 डिप्टी रेंजर और 28 नाकेदारों ने जंगलों में जाकर गणना की।

पांढुर्ना. दक्षिण वन मंडल के अंतर्गत वन परिक्षेत्र पांढुर्ना के 31 जंगल बीट में मांसाहारी वन्यप्राणियों की गणना पूरी हुई है। इस गणना में पांच प्रजातियों के मांसाहारी वन्यप्राणी पांढुर्ना के जंगलों में होने की बात सामने आई है। 9 मार्च से 11 मार्च तक चली वन्यप्राणी बाघ-तेंदुआ गणना के अंतर्गत 31 बीटों में 6 डिप्टी रेंजर और 28 नाकेदारों ने जंगलों में जाकर गणना की। इस दौरान वनकर्मियों को दुधा के जंगल में लोमड़ी का बच्चा साक्षात दिखाई दिया। वन परिक्षेत्र कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र सीमा पर वर्धा नदी के पास स्थित पेंढोनी के जंगल में भालू, लोमड़ी और जंगली बिल्ली होने की जानकारी मिली है।
वनकर्मियों ने वन्यप्राणी के विष्ठा के आधार पर इनकी गणना की है। इसके अलावा भूरा नेवला, लोमडी, लकड़बग्घा, जंगली बल्ली के अधिक संख्या में पाए जाने की जानकारी सामने आई है।
वन परिक्षेत्र कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार पांढुर्ना में जंगली बिल्ली, खड़की में जंगली बिल्ला, दुधा में भेडिया का बच्चा, देवनाला के जंगलो में लकड़बग्धा, बंधान में लोमडी और कालापाठा में लकडबग्घा, चिचोली में जंगली बिल्ली,पिपलपानी में जंगली बिल्ली और लोमड़ी, पेंढोनी में भालू, भेडिय़ा और जंगली बिल्ली पायी गई है।

वन्यप्राणियों की कमी पर उठ रहे है सवाल
हाल ही में हुई गणना ने कई सवाल पैदा कर दिए है। गणना के अनुसार पांढुर्ना के वनों से मांसाहारी वन्यप्राणी की कमी होने की बात भी सामने आई है। रात को जंगलों से शिकार होने के कारण महाराष्ट्र से सटे जंगलों में पाए जाने वाले जंगली जानवर महाराष्ट्र के जंगलों में अधिक समय बीता रहे है। जबकि रात होते ही प्रदेश के जंगलों में शिकारियों की घुसपैठ बढऩे की बात ग्रामीण कह रहे है। वनकर्मियों की ड्यूटी सिर्फ दिन तक ही सीमित रह गई है। जिससे आने वाले दिनों में मांसाहारी वन्यप्राणी के खत्म होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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