Corona curfew side effects: रोजगार पर असमंजस में सरकार

दूसरे राज्यों से घर लौटे कुशल श्रमिकों को नहीं मिल पा रहा विशिष्ट श्रेणी का रोजगार, अकुशल श्रमिकों को मनरेगा में मजदूरी, कुशल की नौकरी ढूंढने में निष्क्रिय पड़ा श्रम विभाग

By: prabha shankar

Updated: 08 May 2021, 10:40 AM IST

छिंदवाड़ा। कोरोना संक्रमण के केस बढऩे पर देश के विभिन्न राज्यों से लौटे प्रवासी कुशल श्रेणी के श्रमिकों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार का इंतजाम नहीं हो पाया है। अकुशल श्रेणी के मजदूरों को तो प्रशासन ने मनरेगा में मजदूरी दे दी है। फिलहाल कुशल श्रमिकों को रोजगार सेतु में पंजीबद्ध करने के निर्देश आए हैं, रोजगार पर सरकार भी असमंजस में दिख रही है।
पूरे जिले की पंचायतों में आई जानकारी के अनुसार एक अप्रैल से अब तक कोरोना संक्रमण काल में 1209 प्रवासी मजदूर अलग-अलग श्रेणी के दर्ज हुए हैं। ये लोग महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, दिल्ली के साथ मप्र के अलग-अलग शहरों में मजदूरी या फिर फैक्ट्रीज में काम करने गए थे। कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए फिलहाल अपने घर लौट आए हैं। इनमें से करीब 700 अकुशल श्रेणी के मजदूरों को स्थानीय स्तर पर पंचायतों ने मनरेगा का काम दे दिया है। शेष 509 ऐसे मजदूर हंै जो किसी फैक्ट्रीज में मिस्त्री, ऑपरेटर या कोई विशिष्ट काम करते थे। इन्हें उसी श्रेणी में काम दिलाना प्रशासन के बस में नहीं दिख रहा है। राज्य शासन के ध्यान में ये जानकारी लाई गई तो भोपाल से यहीं निर्देश आए कि इन श्रमिकों को रोजगार सेतु ऐप में दर्ज किया जाए। जैसे ही कोई काम दिखे तो प्रयास किए जाएं। यह काम श्रम विभाग का है, लेकिन अधिकारी न होने से रोजगार के प्रयास और रिपोर्टिंग नहीं हो पा रही है।

कफ्र्यू होने से काम बंद, कैसे मिले रोजगार
पिछले आठ अप्रैल से लगातार कोरोना कफ्र्यू लागू होने से शहर समेत पूरे जिले में निजी स्तर के इंजीनियरिंग, निर्माण, बिजली समेत अधिकांश काम धंधे बंद हो गए हैं। इससे इनसे जुड़े श्रमिक वैसे ही बेरोजगार होकर घर बैठे हैं। ऐसे में कुशल श्रेणी के प्रवासी मजदूरों को कैसे रोजगार मिले, यह सोचनीय विषय है। प्रशासनिक अधिकारी भी यह दबी जुबान से स्वीकार कर रहे हैं। पिछले साल 2020 में भी लॉक डाउन के समय यहीं परिस्थितियां बनी थी। उस समय 13 हजार 127 मजदूर वापस आए थे, छह माह तक घर में बैठना पड़ा था।

रेत, गिट्टी और लोहा की समस्या, नहीं तो पीएम आवास में मिलता काम
पूरे जिले की पंचायतों में इस वित्तीय वर्ष 2021-22 में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 25 हजार आवास का लक्ष्य आया है। इन आवासों के निर्माण कफ्र्यू में रेत, गिट्टी और लोहा समेत अन्य सामानों की दुकानें बंद होने से रुके पड़े हैं। इस काम में प्रवासी राज मिस्त्री को अटैच किया जा सकता है। फिलहाल इसकी सम्भावना दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है।

शहरी निर्माण मजदूरों की भी आफत, काम बंद होने से घर पर बैठे
कोरोना संक्रमण बढऩे से प्रवासी मजदूरों को देश-प्रदेश में अपना रोजगार छोडकऱ लौटना पड़ा है तो वहीं शहरी निर्माण मजदूरों पर भी आफत टूट पड़ी है। कफ्र्यू में काम बंद से एक माह से घर पर बैठे हैं। नमक, तेल, मिर्च समेत छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है। अभी तक ये मजदूर मकान,भवन समेत अन्य निर्माण कार्यों में संलग्न होकर अपनी रोजी-रोटी चलाते थे। इनके पास तो ग्रामीणों की तरह मनरेगा में मजदूरी का साधन भी नहीं है। फिलहाल यह वर्ग इस समय सबसे ज्यादा परेशानी से गुजर रहा है। सरकारी योजनाएं भी इन्हें सहारा नहीं दे रहीं हैं।

इनका कहना है
अप्रैल से अब तक 1209 प्रवासी मजदूर अपने घर लौटे हैं। इनमें कुशल श्रेणी के मजदूरों को फिलहाल रोजगार सेतु से जोडऩे के लिए कहा गया है। शेष अकुशल मजदूरों को मनरेगा से रोजगार का इंतजाम किया गया है।
-सुशील गुप्ता, अतिरिक्त सीइओ जिला पंचायत।

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