Negligence: दो विभागों की लड़ाई में गरीबों की थाली रही खाली, कालाबाजारी की आशंका

Negligence: राशन दुकान खुलने के इंतजार में बीत गया जून, गेहूं भी मुश्किल से मिला

By: prabha shankar

Updated: 02 Jul 2020, 05:09 PM IST

छिंदवाड़ा/ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना संकटग्रस्त गरीबों को मुफ्त अनाज देने की भले ही घोषणा करें, लेकिन वितरण सिस्टम में समन्वय के अभाव में जरूरतमंदों की थाली तक दाल-चावल तक नहीं पहुंच पा रहा है। स्थिति यह है कि पूरा जून माह गुजरने के बाद भी अधिकांश स्थानों पर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का अनाज नहीं पहुंचा। इसके लिए जिम्मेदार खाद्य आपूर्ति विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारी आवंटन के आंकड़ों को लेकर आपस में उलझ गए। वितरण की समस्या का हल कोई नहीं निकाल पाया है।
इस योजना के मुताबिक हर राशनकार्डधारी को पांच किलो चावल और एक किलो दाल कोरोना राहत के नाम पर हर माह देना है। अब तो प्रधानमंत्री ने इसकी अवधि नवम्बर तक घोषित कर दी है। एक दिन पहले बीते जून माह में चावल 81 हजार 300 क्विंटल की जरूरत का केवल 44 प्रतिशत राशन दुकानों तक पहुंचा तो वहीं तुअर दाल 38 फीसदी थी। गेहूं भी 23 जून तक नए और पुराने जिंस के चक्कर में उलझा रहा। आखिर में प्रशासन ने किसानों से खरीदे गए गेहूं को ही वितरित करने के आदेश दिए। इस अनियमित आवंटन के चलते जून के अंतिम दिन जिलेभर की 715 राशन दुकानों में अधिकांश खुल नहीं सकीं और इसका वितरण नहीं हो पाया। पूरे जिले में 3.50 लाख जरूरतमंद परिवार हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो जून माह में अधिकांश गरीबों की थाली में चावल, दाल और गेहूं नहीं पहुंचा। फिर अधिकारी यह भी नहीं बता रहे हैं कि जून माह के आवंटन का अनाज राशन दुकान से जुलाई में मिलेगा या नहीं। वे राज्य शासन के आदेश की राह तक रहे हैं।

गेहूं, चावल और दाल में कालाबाजारी की आशंका
इस पूरे मामले में खाद्य आपूर्ति और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारी आवंटन के आंकड़ों को लेकर उलझे हैं वहीं इसकी आड़ में जून में पहुंचे गेहूं, चावल और दाल की कालाबाजारी होने की आशंका बढ़ती जा रही है। गरीब औरजरूरतमंद राशन दुकानों के केवल चक्कर लगा सकते हैं।इसकी आड़ में उनका अनाज बाजार में ऊंचे दामों पर तो नहीं बिक रहा है, इसकी कोई निगरानी प्रणाली दिखाई नहीं देरही है।

खाद्य आपूर्ति विभाग ने नान को ठहराया जिम्मेदार
खाद्य आपूर्ति अधिकारी ने नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक को लिखे पत्र में साफ कहा कि जिले के आवंटन के अनुरूप अनाज देने में लापरवाही बरती गई है। अप्रैल का आवंटन पूर्ण न होने पर भी जून का प्रदाय प्रारम्भ कर दिया गया। स्वाभाविक रूप से कुछ दुकानों में दो माह की दाल की पूर्ति नहीं हो सकी। इससे उपभोक्ताओं में भ्रम एवं असंतोष की स्थिति बन रही है। मनमाने ढंग से खाद्यान्न एवं दलहन प्रदाय कराया जाना आपत्तिजनक है।


इनका कहना है
अप्रैल से जून तक अनाज आवंटन में लापरवाही पर नागरिक आपूर्ति निगम को पत्र लिखा गया है। जुलाई में जून माह के दाल, चावल आवंटन को राशन दुकानों में वितरित कराने का प्रयास करेंगे।
जीपी लोधी, जिला आपूर्ति अधिकारी

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