scriptTwo children of the death in 72 hours, Chhindwara | Video Story : 72 घंटे में शिशु गृह के दो बच्चों की मौत से मचा हडकंप | Patrika News

Video Story : 72 घंटे में शिशु गृह के दो बच्चों की मौत से मचा हडकंप

हमारी चिकित्सा पद्धति इतनी कमजोर थी कि हम नौनिहालों की जान नहीं बचा पाए या फिर जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई।

छिंदवाड़ा

Updated: November 08, 2021 01:31:28 pm

छिंदवाड़ा. जिस दिन हम सभी दीपों का पर्व दीपावली मना रहे थे, उसी दिन शिशु गृह में पल रहे एक अनाथ आठ माह के बच्चे ने दम तोड़ दिया। इसी के ठीक दो दिन बाद 6 नवंबर को शिशु गृह के ही एक और बच्चे की मौत हो गई। दोनों बच्चों की मौत की वजह बीमारी बताई जा रही है। बड़ी बात यह है कि शिशु गृह ने जिम्मेदारों को पत्र भेजकर बच्चों की बीमारी के प्रति आगाह किया था और उन्हें किसी ऐसे जगह शिफ्ट करने की बात कही थी जहां उनका इलाज अच्छे से हो सके, लेकिन जिम्मेदारों ने नहीं सुनी। परिणाम यह रहा कि आए दिन बच्चे अधिक बीमार होने पर जिला अस्पताल पहुंचते और थोड़ा ठीक होने पर वापस शिशु गृह पहुंच जाते। अंतत: उनकी मौत हो गई।
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जानकारों का कहना है कि प्रशासन द्वारा बच्चों को किसी अन्य जगह इलाज के लिए भेजा जाना चाहिए था। कम से कम एक बार कोशिश तो की जानी चाहिए थी। बीमारी की वजह से संभव है कि मां-बाप ने भी उन्हें सडक़ किनारे अनाथ बनाकर छोड़ दिया होगा, लेकिन जिम्मेदारों ने शिशु गृह में भर्ती कराकर और जिला अस्पताल में उपचार कराकर किनारा कर लिया। भले ही बच्चों की बीमारी कुछ भी रही हो, लेकिन क्या हमारी चिकित्सा पद्धति इतनी कमजोर थी कि हम नौनिहालों की जान नहीं बचा पाए या फिर जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। बच्चे अपनी मौत के साथ ही कइयों पर सवाल खड़े किए हैं। बच्चों की मौत के बाद बाल कल्याण समिति, शिशु गृह, महिला बाल विकास अपनी जिम्मेदारी से यह कहकर किनारा कर रहे हैं कि दोनों बच्चे बीमार थे। हकीकत क्या है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा।
आठ साल से संचालित शिशु गृह

गौरतलब है कि रेलवे स्टेशन के पास त्रिलोकीनगर में महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से सोशल केयर नवजागृति महिला मंडल द्वारा विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरण/शिशु गृह संचालित किया जा रहा है। यह शिशु गृह लगभग आठ साल से संचालित हो रहा है। शिशु गृह में अनाथ बच्चों को रखा जाता है। वर्तमान में यहां 15 अनाथ बच्चे हैं। इसमें एक बेटा और 14 बेटियां हैं। सभी की उम्र सात साल से कम है। शिशु गृह में एक दिन पहले 16 बच्चे थे वहीं दो दिन पहले 17 बच्चे थे, लेकिन दो बच्चों की अचानक मौत ने सवाल खड़ा कर दिया है। शिशु गृह संचालिका विनीता कुशवाहा का कहना है कि बाल कल्याण समिति ने बीमार हालत में बच्चों को उनको सौंपा था।


18 मई को आया था पहला बच्चा

मई 2021 को गुलाबरा में एक आठ माह का बच्चा पुलिस को मिला था। उसे कुछ दिन जिला अस्पताल में भी रखा गया था। इसके बाद 18 मई को बच्चे के लालन-पालन के लिए शिशु गृह को सौंपा दिया गया।शिशु गृह संचालिका का कहना है कि बच्चा पैदायशी बीमार था। वह दूध नहीं पी पा रहा था। वहीं दूसरा लगभग एक साल का बच्चा सौंसर में मिला था। 26 अक्टूबर 2021 को बाल कल्याण समिति ने इस बच्चे को शिशु गृह को सौंपा था। बीमारी की वजह से आए दिन बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा था। 4 नवंबर को पहले एवं 6 नवंबर को दूसरे बच्चे की मौत जिला अस्पताल में इलाज के दौरान हुई।

छह साल पहले भी हुई थी मौत

लगभग छह साल पहले भी शिशु गृह के एक बच्चे की मौत हो चुकी है। उस समय भी लापरवाही उजागर हुई थी, लेकिन कुछ दिन बाद मामला शांत हो गया।

शासन उठाती है खर्च

शिशु गृह में अनाथ बच्चों का लालन-पालन का पूरा खर्च सरकार वहन करती है। बच्चों के लिए बकायदा एक डॉक्टर भी नियुक्त किया जाता है। इसके अलावा उनके देखभाल के लिए भी नियुक्ति होती है। सभी खर्चा सरकार द्वारा ही वहन किया जाता है।




इनका कहना है...
मैंने कई बार कहा था कि बच्चे बीमार हैं। बच्चे लगातार डॉक्टर के निगरानी में थे। बच्चे की बीमारी की जानकारी हमने बाल कल्याण समिति, कलेक्टर, महिला बाल विकास, बाल आयोग को दी थी। पत्र लिखकर कहा था कि बच्चे बहुत बीमार हैं। इन्हें वहां स्थांनातरित किया जाए जहां बच्चों का इलाज अच्छे से हो सके।
-विनीता कुशवाहा, संचालिका, शिशु गृह

दोनों बच्चों की बीमारी लाइलाज थी। उनका इलाज भी अस्पताल में चल रहा था। थोड़ा ठीक होने पर वे शिशु गृह में जाते थे। हमने छिंदवाड़ा में कई डॉक्टरों से जांच भी कराई थी।
-किरण लता चोपड़े, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति

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