World Happiness Day: जीवन के ये मंत्र कर देंगे टेंशन दूर..जानिए

समाज में सकारात्मक सोच और दूसरों को देने के आनंद का भाव लाने की जरूरत

 

छिंदवाड़ा/सुबह से शाम दौड़ती-भागती जिंदगी मानसिक तनाव दिनचर्या का हिस्सा हो गया है। यह प्रकृति से अलग जीवन शैली,खान-पान,समाज में फैलती नेगेटिव सोच और जानकारी का नतीजा है। यदि मार्निंग वॉक,पॉजीटिव सोच,धन्यवाद,क्षमा भाव से काम किया जाए तो हर चेहरे पर मुस्कान लाई जा सकती है। विश्व प्रसन्नता दिवस 20 मार्च के मौके पर राज्य आनंदम् संस्थान द्वारा आनंदमय जीवन के लिए हर नागरिक को ये टिप्स दिए गए हैं।
संस्थान के मुताबिक समाज में इस समय 80 फीसदी लोग नकारात्मक सोच से तनाव भरा जीवन जी रहे हैं। इससे चिड़चिड़ापन,गुस्सा,लड़ाई-झगड़े के साथ आत्मघाती प्रवृत्ति बढ़ रही है। इसके साथ ही आए दिन सड़क दुर्घटनाएं,विवाद और अन्य घटनाएं सामने आ रही है। समाज में बढ़ती इस दुखदायी प्रवृत्ति में बदलाव ही आनंदम् संस्थान का मकसद है। इसके लिए हर व्यक्ति में सकारात्मक सोच को बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया गया है। आनंदम् संस्थान के नोडल अधिकारी डीके मिश्रा का कहना है कि समाज में पॉजीटिव सोच लाने के लिए हर जिले के शासकीय कार्यालयों में अल्प विराम शीर्षक से पहल की गई है। जिससे अधिकारी-कर्मचारियों के साथ समाज के विचारों को अधिक सकारात्मक बनाया जाए। उनके मुताबिक इस समय हर व्यक्ति को अपनी अंतरात्मा की आवाज को सुनने का नियमित अभ्यास करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि दूसरे की परवाह,आनंद प्राप्त करने की पहली और मूलभूत शर्त है। दूसरों की मदद न सिर्फ दूसरे को खुशी देगी बल्कि उससे लोग स्वयं भी आनंदित होंगे।
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आनंदम् संस्थान के ये पांच मंत्र लाएंगे बदलाव
1.धन्यवाद-अपनी जिंदगी में किन चीजों के लिए हम आभारी है।
2.क्षमायाचना-क्या मुझे किसी से क्षमा मांगनी है और किस बात के लिए।
3.परिवर्तन-कौन सी आदत या व्यवहार और रवैया है जिसे मुझे बदलना है।
4.कौन-मैं किसी परवाह करता हूं। आज मैं किसकी सहायता या मदद कर सकता हूं।
5.कार्य-अपने समाज के लिए मैं क्या कर सकता हूं,मुझे क्या होना होगा।
नोट-अच्छा होगा कि शाम को अपनी नोटबुक को देखें और विचार करें कि ऐसा कौन सा काम शेष रह गया है जो आपको करना था और नहीं कर पाए। इसका जवाब ही आपको संतुष्टि और आनंदमय जीवन की ओर ले जाएगा।
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छिंदवाड़ा में बनी नेकी की दीवार
दूसरों को देने के भाव से पहले 'पत्रिकाÓने नेकी की दीवार अभियान से लोगों से जरूरतमंदों को कपड़ों समेत अन्य गैर उपयोगी चीजें दान दिलवाई थी। इसके बाद राज्य सरकार के निर्देश के बाद जेल तिराहा और गांधीगंज में इस दीवार का निर्माण भी कराया गया। तब से जरूरतमंदों को दान की यह परम्परा निभाई जा रही है।
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Patrika
manohar soni Reporting
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