भारत बंद का मिला जुला असर केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों ने जमकर निकाली भड़ास

भारत बंद का मिला जुला असर केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों ने जमकर निकाली भड़ास

Akanksha Singh | Publish: Sep, 10 2018 05:33:35 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

जनपद मुख्यालय में बंद का ठीक ठाक असर देखने को मिला इस दौरान विपक्षियों ने मोदी सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली

चित्रकूट: पेट्रोल डीजल एलपीजी के बढ़े हुए दामों व् महंगाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों के भारत बंद का मिला जुला असर रहा. कस्बाई व् ग्रामीण इलाकों में जहां बंद आंशिक रूप से लगभग बेअसर नजर आया वहीँ जनपद मुख्यालय में बंद का ठीक ठाक असर देखने को मिला. इस दौरान विपक्षियों ने मोदी सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली और पेट्रो पदार्थों में बेतहाशा मूल्य वृद्धि पर चौतरफा घेरते हुए आम आदमी को महंगाई से पस्त करने वाली सरकार बताया. भारत बंद के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के भी व्यापक इंतजाम किए गए थे खासतौर पर मुख्यालय में पुलिस की कड़ी निगहबानी रही.

मोदी सरकार के खिलाफ जमकर निकाली भड़ास

पेट्रोल डीजल एलपीजी व् महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों ने भारत बंद के दौरान सरकार को घेरते हुए जमकर अपनी भड़ास निकाली. किसी ने महंगाई तो किसी ने आम आदमी के जेब में डांका डालने वाली सरकार बताते हुए मोदी सरकार को लपेटे में लिया और हर मुद्दे पर इस सरकार को विफल बताया. जनपद मुख्यालय में सपा व् कांग्रेस के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे और बाजारों को बंद करवाया. कई जगहों पर सभाएं आयोजित की गईं जिसमें सरकार की आर्थिक नीतियों से लेकर विदेश नीति व् आम आदमी के मुद्दे पर तीखी आलोचना की गई.

जमकर हुई नारेबाजी

केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की. जुमलों वाली सरकार, आम आदमी की विरोधी सरकार जैसे नारों से कार्यकर्ताओं ने सरकार को घेरा. सभाओं में भाजपा को महंगाई का दूत बताया गया.

मिला जुला रहा बंद का असर

जनपद के मऊ मानिकपुर पहाड़ी व् राजापुर आदि बड़े कस्बाई क्षेत्रों में भारत बंद का मिला जुला असर रहा. मऊ कस्बे में तो एक भी दुकान नहीं बंद हुई और बड़े बाजार हर दिन की तरह खुले रहे. वहीँ मानिकपुर थाना क्षेत्र में कांग्रेस व् सपा कार्यकर्ताओं ने काफी हद तक भारत बंद सफल बनाने का प्रयास किया जिसमे वे आंशिक रूप से सफल भी हुए और कई व्यापारियों ने इस बंद का समर्थन किया. कुछ ऐसा ही दृश्य रहा अन्य कस्बाई व् ग्रामीण क्षेत्रों का.

 

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