बॉलीवुड में गुलाबी गैंग कमांडर की दस्तक इस फ़िल्म से हो रही फ़िल्मी सफर की शुरुआत

बॉलीवुड में गुलाबी गैंग कमांडर की दस्तक इस फ़िल्म से हो रही फ़िल्मी सफर की शुरुआत

Akanksha Singh | Publish: Sep, 03 2018 07:24:04 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

महिला अधिकारों के लिए संघर्ष के रूप में देश दुनिया में एक अलग मुकाम बना चुकीं गुलाबी गैंग कमांडर संपत पाल अब बॉलीवुड में दस्तक देने जा रही हैं

चित्रकूट: महिला अधिकारों के लिए संघर्ष के रूप में देश दुनिया में एक अलग मुकाम बना चुकीं गुलाबी गैंग कमांडर संपत पाल अब बॉलीवुड में दस्तक देने जा रही हैं. संपत पाल अपनी पहली हिंदी फ़िल्म में लीड रोल में नजर आएंगी. फ़िल्म की शूटिंग शुरू हो चुकी है और संपत पाल की भूमिका का फिल्मांकन(शूटिंग) भी जल्द ही यूपी के मेरठ में फिल्माया जाएगा. गुलाबी गैंग कमांडर वैसे तो इससे पहले भी माया नगरी में बिग बॉस कौन बनेगा करोड़ पति जैसे कार्यक्रमों में शिरकत करके अपनी उपस्थिति एक सशक्त महिला के रूप में दर्ज करा चुकी हैं लेकिन फ़िल्म इंडस्ट्री में ये उनका पहला कदम होगा बतौर फ़िल्मी पात्र के रूप में. संपत पाल के जीवन पर आधारित गुलाब गैंग फ़िल्म भी बन चुकी है बॉलीवुड में जिसमें मशहूर अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने मुख्य भूमिका निभाई थी.


फ़िल्मी सफर पर निकलीं गुलाबी गैंग कमांडर

बुन्देलखण्ड की आयरन लेडी के रूप में पहचानी जाने वालीं गुलाबी गैंग कमांडर संपत पाल अब अपने जीवन के एक नए सफर पर निकल रहीं हैं. "जाको राखे साइयां" नाम की फ़िल्म में मुख्य भूमिका के रूप में गुलाबी गैंग कमांडर के इस सफर की शुरुआत हो रही है. फ़िल्म के निर्देशक हैं इरशाद खान. फ़िल्म में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता कॉमेडियन राजपाल यादव , जाकिर हुसैन आदि अभिनेता भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं. फ़िल्म का मुहूर्त शॉट बीते 28 अगस्त को फिल्माया जा चुका है.


चिर परिचित भूमिका में नजर आएंगी संपत पाल


पत्रिका से दूरभाष पर बातचीत के दौरान जानकारी देते हुए गुलाबी गैंग कमांडर संपत पाल ने बताया कि फ़िल्म में भी उनकी भूमिका उनके चिर परिचित अंदाज व् व्यक्तित्व के अनुरूप महिला अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली एक महिला के रूप में होगी जो व्यवस्था की अव्यवस्था के खिलाफ सशक्त तरीके से लड़ते हुए आवाज उठाती है और अधिकारीयों को सबक सिखाती है. गुलाबी गैंग कमांडर ने बताया कि उनकी शूटिंग 5 से 7 सितम्बर तक मेरठ में होनी है. फ़िल्मी सफर के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यदि वे आज सिर्फ चूल्हे चौके में बंधी होतीं तो शायद यहां तक नहीं पहुंचती. बुंदेलखण्ड की महिलाओं की पहचान आज देश दुनिया में यदि उनकी वजह से हो रही है तो ये उनके लिए गर्व की बात है. असल जिंदगी की तरह फ़िल्म में भी वो जीने मरने से नहीं डरतीं इसलिए फ़िल्म का नाम पड़ा जाको राखे साइयां. संपत पाल ने कहा कि पुरुष और स्त्री बराबर हैं और दोनों को एक दूसरे को समझना होगा लेकिन महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए चुप भी नहीं रहना चाहिए.

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