चित्तौड़ को चंबल के पानी की डीपीआर व सर्वे के कार्यादेश जारी

चित्तौडग़ढ़ शहर सहित विधानसभा क्षेत्र के 265 गांवों में पेयजल संकट दूर करने के लिए चंबल परियोजना के जरिए पानी लाने की योजना को स्वीकृति मिलने के बाद अब इसकी डीपीआर तैयार करने व सर्वे के कार्यादेश जारी कर दिए गए हैं। इस कार्य पर 156.32 लाख रूपए खर्च किए जाएंगे।

By: jitender saran

Published: 18 Sep 2021, 10:10 PM IST

चित्तौडग़ढ़
चित्तौडग़ढ़ शहर सहित विधानसभा क्षेत्र के २६५ गांवों में पेयजल संकट दूर करने के लिए चंबल परियोजना के जरिए पानी लाने की योजना को स्वीकृति मिलने के बाद अब इसकी डीपीआर तैयार करने व सर्वे के कार्यादेश जारी कर दिए गए हैं। इस कार्य पर १५६.३२ लाख रूपए खर्च किए जाएंगे।
चित्तौड़ तक चंबल का पानी लाने को लेकर तकनीकी स्वीकृति भी जारी हो गई है। प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति पिछले माह जारी हो गई थी। यह कार्य जल जीवन मिशन के तहत किया जा रहा है। डीपीआर व सर्वे के लिए जयपुर की नेबकॉन्स कंपनी को कार्यादेश जारी किए गए है। कंपनी को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग चित्तौडग़ढ़ के संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय करने को कहा गया है।
राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत चित्तौडग़ढ़ विधानसभा क्षेत्र में चित्तौड़ पंचायत समिति के २२० व भदेसर पंचायत के ४५ यानी कुल २६५ गांवों के लोगों को चंबल परियोजना के जरिए पानी की सौगात दी है। विधानसभा क्षेत्र को चंबल परियोजना से जोडऩे के लिए राज्य स्तरीय योजना स्वीकृति समिति ने हाल ही चित्तौड़ विधानसभा क्षेत्र में चंबल का पानी पहुंचाने के लिए डीपीआर बनाने को मंजूरी दे दी थी और अब डीपीआर और सर्वे के कार्यादेश भी जारी कर दिए गए हंै। इसके साथ ही चित्तौडग़ढ़ विधानसभा तक चंबल का पानी पहुंचाने वाली इस योजना का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। मेजर प्रोजेक्ट्स के तहत चितौडग़ढ़ और उदयपुर में सर्वे व डीपीआर तैयार करने के दो कार्यों के लिए 268.60 लाख रूपए स्वीकृत किए गए थे।

३६ हजार से ज्यादा नल कनेक्शन मिलेंगे
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता सुरेन्द्र सिंह जाडा़वत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अवगत कराया था कि आने वाले समय में चित्तौडग़ढ़ विधानसभा क्षेत्र में भारी पेयजल संकट पैदा होने की आशंका है। जाड़ावत ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया था कि विधानसभा क्षेत्र में चंबल परियोजना से पानी लाने की योजना को स्वीकृति दी जाए, ताकि यहां की पेयजल समस्या दूर हो सके। मुख्यमंत्री ने पेयजल संकट को देखते हुए तुरंत संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए और अब चित्तौडग़ढ़ विधानसभा क्षेत्र में चंबल परियोजना से पानी लाने के लिए डीपीआर बनाने और सर्वे का काम भी जल्द शुरू होने जा रहा है।
चित्तौडग़ढ़ व भदेसर पंचायत समिति क्षेत्र के लोग पीने के पानी के लिए भूमिगत जल पर निर्भर है। जो गर्मी के दिनों में लाइम स्टोन आदि के कारण सामान्यत: सूख जाता है। चित्तौडग़ढ़ पंचायत समिति के २२० व भदेसर पंचायत के ४५ गांवों को शामिल किया गया है। वर्ष २०२३ तक इस विधानसभा क्षेत्र में आबादी १६.०९ प्रतिशत बढकर करीब २ लाख ४७ हजार १६१ हो जाएगी। वर्ष २०३८ तक इस क्षेत्र में १६.०४ एमएलडी पानी की आवश्यकता होगी। वर्ष २०५३ तक विधानसभा क्षेत्र में ६१० एमसीएफटी पानी की आवश्यकता होगी, लेकिन घोसुण्डा बांध में दो सौ एमसीएफटी व भैरड़ा माइंस से सौ एमसीएफटी पानी ही मिल पाएगा। चित्तौडग़ढ़ विधानसभा क्षेत्र की आबादी वर्ष २०५४ तक दोगुनी हो जाएगी। इससे पानी की मांग बढेगी, लेकिन जल संसाधन सीमित होने से भयंकर जल संकट पैदा होने को लेकर मुख्यमंत्री के निर्देश और जाड़ावत के प्रयासों से यह काम संभव हो पाया है।

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