किसने कहा कि मीरा का काव्य एवं दर्शन सदियों तक हमारी धरोहर

किसने कहा कि मीरा का काव्य एवं दर्शन सदियों तक हमारी धरोहर

Nilesh Kumar Kathed | Publish: Sep, 10 2018 10:53:41 PM (IST) Chittorgarh, Rajasthan, India

मीरा काव्य समपर्ण का मानक पाठ है जो सदियों तक हमारी धरोहर बनेगा।

 

 

चित्तौडग़ढ. मीरा काव्य समपर्ण का मानक पाठ है जो सदियों तक हमारी धरोहर बनेगा। मीरा को समझने के लिए तत्कालीन परिस्थितियों को समझना होगा। ये विचार सोमवार को भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर) एवं मीरा स्मृति संस्थान की ओर से संयुक्त रूप से मीरा दर्शन और भक्ति तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के समापन सत्र में उभर कर आए।। समारोह की अध्यक्षता करते हुए आईसीपीआर के चेयरमेन प्रो. एस. आर. भट्ट ने कहा कि संतो पर विचार-विमर्श एवं उनसे लाभान्वित होने की दिशा में ऐसी संगोष्ठी समाज को एक नई दिशा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि मीरा साहित्य ने भारतीय संस्कृति को परिपुष्ट किया व जीवन दृष्टि प्रदान की। भट्ट ने ब्रज भाषा अकादमी का मीरा नृत्य नाटिका तथा हवेली संगीत का मनमोहक प्रस्तुतिकरण करने के लिए आभार जताया। मुख्य अतिथि विष्णु स्वामी फाउण्डेशन, चैन्नई के स्वामी हरिप्रसाद ने कहा कि मीरा से जुड़ कर हम भावात्मक रुप से एकाकार हो सकेगें। इससे पूर्व प्रात:कालीन सत्र की चर्चा की अध्यक्षता करते हुए डॉ कैलाशनाथ तिवारी ने कहा कि मीरा को समझने के लिए तत्कालीन परिस्थितियों को समझना होगा। उनका मत था कि श्रेयस को प्राप्त करने के लिए पहले प्रेयस मार्ग चुनना पड़ता है। उन्होंने कहा मीरा का जीवन यह बोध कराता है कि ़हमें परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए अपने ध्येय की ओर सतत बढऩा चाहिए। सुलतानपुर से आए डॉ सुशील कुमार ने मीरा की भक्ति को श्रेय-प्रेय का माध्यम बताते हुए कहा कि कड़वी से कड़वी परिस्थितियों में भी जीने का तैयार रहना चाहिए।शान्ति निकेतन विश्व भारती से सम्बद्ध शुभ्र जयोतिदास ने कहा कि मीरा की भक्ति को सगुण-निर्गुण में विभाजित न करें। यह ज्ञान-कर्म और भक्ति की त्रिवेणी है। उदयपुर की डॉ.मंजु चतुर्वेदी ने कहा मीरा मात्र ऐसी भक्त हैं जिसने काल की सीमाओं को लांघ दिया। पुरी से आए जगन्नाथ ने बताया कि मीरा भक्ति का अवतार थी और आनन्दमग्न हो गई। योग प्रशिक्षक अभिषेक कुमावत ने मीरा साहित्य में आत्म निवेदन की प्रमुखता को रेखांकित किया। चित्तौडग़ढ़ के डॉ उदयसिंह, वर्धा से गोपीनाथन,चण्डीगढ़ से आए डॉ अमरसिंह वधावन, जगन्नाथपुरी के कालूचरण पाण्डेय, बीकानेर के डॉ कृष्ण लाल विश्नोई,अजमेर के डॉ जितेन्द्र छगानी आदि ने भी विचार व्यक्त किए। गत दो दिन से यहां सभागार में लगभग 50 से अधिक शोध पत्र पढ़े गए।
मीरा भक्ति व दर्शन को पाठ्य़क्रमों में सम्मिलित करें
मीरा स्मृति संस्थान के अध्यक्ष सत्यनारायण समदानी ने मीरा को विश्व विभूति बताते हुए कहा कि मीरा के लोकदर्शन को पाठ्यक्रमाों में सम्मिलित किया जाना चाहि। इससे नव पीढ़ी तक मीरा की भक्ति और दर्शन का ज्ञान पहुंचाया जा सके। समदानी एवं आईसीपीआर के सचिव डॉ रजनीश शुक्ला, अकादमिक समन्वयक डॉ लक्ष्मी अय्यर ने आयोजन में शामिल होने वाले प्रतिभागियों का आभार जताया।
विद्वानों ने किया मीरायन कला दीर्घा का अवलोकन
राष्ट्रीय सेमिनार में शामिल होने आए विष्णु मोहन फाउण्डेशन चैन्नई के हरिप्रसाद स्वामी सहित कई विद्वानों ने डॉ. सुशीला लढ़ा के निवास स्थल पर स्थित टेराकोटा मृण कला में भक्त शिरोमणि मीराबाई के 51 प्रामाणिक भजनों पर आधारित मीरायन कला दीर्घा का अवलोकन किया। केन्द्रीय विश्व विद्यालय किशनगढ़ की हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष एवं कला संकाय अधिष्ठाता तथा राष्ट्रीय मीरा संगोष्ठी की अकादमिक संयोजक डॉ. लक्ष्मी अैय्यर ने मीरायन कला दीर्घा में स्वयं को हुई दिव्यानुभूति पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने चारों ओर बगीचे में मीराबाई के साथ भगवान कृष्ण की सात्विक और ईश्वरीय अनुभूति महसूस की।

 

 

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