700बेटियों को पढ़ा रही कॉलेज की दीवारें!

700बेटियों को पढ़ा रही कॉलेज की दीवारें!

Rakesh gotam | Publish: Sep, 10 2018 12:05:03 PM (IST) Churu, Rajasthan, India

ढोल पीट रहे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का, 29 में से 24 व्याख्याताओं के पद रिक्त, साढ़े चाल साल पहले भाजपा सरकार ने खोला था कॉलेज

तारानगर.

 

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का ढोल पीटने वाली भाजपा सरकार की मुख्यमंत्री प्रदेश में गौरव यात्रा निकाल रही हैं। लेकिन गौरव यात्रा का एक कड़वा सच यह भी है कि मुख्यमंत्री ने खुद साढ़े चार साल पहले तारानगर में बालिका कॉलेज खोलकर आज तक कॉलेज को भवन व व्याख्याता नहीं दे सकी। ऐसे में इन बेटियों का भविष्य कितना उज्जवल होगा इस पर सवाल उठना लाजमी है। ऐसे में सवाल उठता है कि छात्राओं को शायद कॉलेज की दीवारे पढ़ा रही हैं। कस्बे में जनवरी २०१४ में १६० सीटों के साथ राजकीय महिला महाविद्यालय स्वीकृत हुआ था। महाविद्यालय में छात्राओं की संख्या भले ही बढ़ाकर ७०० कर दी गई हो लेकिन व्याख्याताओं की स्थिति वहीं की वहीं है। व्याख्याताओं के अभाव में छात्राओं की पढ़ाई चौपट हो रही है। तहसील मुख्यालय पर एकमात्र सरकारी महिला महाविद्यालय में दूर-दराज के गांवों की बालिकाएं पढऩे के लिए आती हैं लेकिन पढ़ाई के अभाव में उनको रोजाना निराश होकर लौटना पड़ता है। महाविद्यालय में कला व विज्ञान वर्ग में शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कुल मिलाकर २९ पद स्थापित हैं लेकिन इनमें से केवल दो व्याख्याता सहित पांच पद ही भरे हैं। 24 पद लम्बे समय से खाली हैं।

 

भूगोल व गणित के व्याख्याता कार्यरत
महाविद्यालय में शैक्षणिक पदों में केवल गणित व भूगोल विषय के ही व्याख्याता कार्यरत हैं। इसके अलावा कला संकाय सहित गृहविज्ञान एवं विज्ञान संकाय में में ११ व्याख्याताओं के पद रिक्त हैं। महाविद्यालय में प्राचार्य का पद भी काफी समय से रिक्त है। महाविद्यालय के पास स्वयं का भवन नहीं होने से इसे अस्थाई तौर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के दक्षिणी खंड में छह कमरों में संचालित किया जा रहा है। जहां न तो छात्राओं के बैठने के लिए कॉमन रूम है और न ही पढऩे के लिए पर्याप्त कक्षा-कक्ष है। छात्राएं

 

अन्य मूलभूत सुविधाओं को भी तरस रही हैं।
सरकार ने महाविद्यालय भवन के लिए कस्बे में पंचायत समिति कार्यालय के पास १५ बीघा १६ बिस्वा जमीन का आवंटन कर रखा है। भवन निर्माण के लिए तीन करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत कर मई २०१७ में भवन निर्माण की आधारशिला तो रखी जा चुकी है लेकिन निर्माण कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। भवन का निर्माण कार्य फरवरी २०१८ में पूरा होना था लेकिन अधिकारियों व ठेकेदारों की लापरवाही के कारण छात्राओं को भवन के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ेगा।

 

कम फीस में सरकारी महाविद्यालय में बढिय़ा शिक्षा व बेहतर सुविधा मिलेगी यही सोचकर महाविद्यालय में प्रवेश लिया था। लेकिन भवन व व्याख्याता के अभाव में छात्राओं की दोनों ही अपेक्षाएं निराधार साबित हो गई।
गरिमा वर्मा, छात्रा कला वर्ग

 

महाविद्यालय में छात्राओं के लिए न तो बैठने के लिए भवन है और न ही अन्य किसी प्रकार की सुविधाएं हैं जो एक सरकारी महाविद्यालय में होनी चाहिए। सुविधाओं के अभाव में छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ।

-प्रियंका सबलानिया

 

कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय जयपुर व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को महाविद्यालय में रिक्त पदों की स्थिति से बार-बार अवगत करवाया जा चुका है लेकिन रिक्त पदों की समस्या ज्यों कि त्यों बनी हुई है। रिक्त पदों के कारण छात्राओं का शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। भवन के लिए जमीन व राशि भी स्वीकृत हो चुकी है लेकिन अधिकारियों की अनदेखी व ठेकेदारों की लेटलतीफी के कारण निर्माण कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है।
एमपी काला, कार्यवाहक प्राचार्य, राजकीय महिला महाविद्यालय तारानगर

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