पानी चालित इंजन बनाने वाले ऑटोमोबाइल इंजीनियर को मिली जान से मारने की धमकी

पानी चालित इंजन बनाने वाले ऑटोमोबाइल इंजीनियर को मिली जान से मारने की धमकी
पानी चालित इंजन बनाने वाले ऑटोमोबाइल इंजीनियर को मिली जान से मारने की धमकी

Dilip Sharma | Updated: 20 Sep 2019, 12:42:05 PM (IST) Coimbatore, Coimbatore, Tamil Nadu, India

पानी से चलने वाले ऑटोमोटिव इंजन का विकास करने वाले शहर के वैज्ञानिक सौंदरराजन कुमारस्वामी को जान से मारने की धमकी मिली है।

कोयम्बत्तूूर. पानी से चलने वाले ऑटोमोटिव इंजन automotive engine का विकास करने वाले शहर के वैज्ञानिक सौंदरराजन कुमारस्वामी को जान से मारने की धमकी मिली है।
गुरुवार को कुमारस्वामी ने पश्चिमी प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक और कोयम्बत्तूर Coimbatore के पुलिस उपायुक्त को जान से मारने की धमकी को लेकर शिकायत की। शिकायत में कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें 14 सितम्बर को एक पत्र मिला जिसमें उन्हें धमकी दी गई है कि अगर दुनिया के किसी भी देश में अपने प्रोजेक्ट पर काम जारी रखेंगे तो जल्द ही उनकी हत्या कर दी जाएगी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
डिस्ल्टिड पानी से चलने वाले इस इंजन का विकास करने वाले कुमारस्वामी मई महीने में उस वक्त सुर्खियों में आए थे जब जापान सरकार की एजेंसी ने उन्हें वहां अपना इंजन लांच करने के लिए आमंत्रित किया था। कुमारस्वामी ने देश में इंजन को लांच करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सकारात्मक जवाब नहीं मिलने के बाद जापान सरकार से इसके लिए संपर्क किया था।
ऑक्सीजन छोडऩे वाला इंजन बनाया
Tiripur तिरुपुर जिले के वेलाकोईल निवासी वैज्ञानिक एस.कुमारस्वामी पेट्रोल -डीजल के विकल्प वाले इंजन पर काम कर रहे हैं, जो प्रदूषण रहित भी होगा। सरकार उनके सुपर सोनिक हाइड्रोजन इंजन hydrogen engine को पिछले साल मंजूरी दे चुकी है। जापान ने भी उनके इंजन की सराहना की है।
कुमारस्वामी ने मई में दावा किया था कि उन्होंने 10 साल की मेहनत से पानी से चलने वाले इंजन को बनाया है। डिस्टिल्ड पानी से चलने वाला यह अपनी तरह का पहला इंजन है, जो पेट्रोल या डीजल के बजाय हाइड्रोजन के इस्तेमाल करता है और ऑक्सीजन छोड़ता है।
एक दशक पहले भी मिली थी धमकी
कुमारस्वामी को इससे पहले 2009 में भी ऐसी धमकी मिल चुकी है। तब उन्हें लश्कर-ए-तोयबा के नाम से लिखे गए पत्र में जान से मारने की धमकी दी गई थी। बाद में यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया गया था।

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