परमात्मा के समस्त गुणों का वर्णन असंभव

परमात्मा के समस्त गुणों का वर्णन असंभव

Kumar Jeevendra | Updated: 12 Jun 2019, 06:04:06 PM (IST) Coimbatore, Coimbatore, Tamil Nadu, India

अपंग व्यक्ति के लिए सारा जंगल पार कर पाना मुश्किल है उसी प्रकार अपने अल्प ज्ञान से अरिहंत परमात्मा के समस्त गुणों को जानना या वर्णन करना असंभव है।

कोयम्बत्तूर.अपंग व्यक्ति के लिए सारा जंगल पार कर पाना मुश्किल है उसी प्रकार अपने अल्प ज्ञान से अरिहंत परमात्मा के समस्त गुणों को जानना या वर्णन करना असंभव है।
यह बात जैन आचार्य विजय रत्नसेन सुरिश्वर ने कही। वह आज यहां आरजी स्ट्रीट स्थित राजस्थान जैन संघ के फतेहपुर हॉल में धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लाखों वर्ष की आयु हो, आत्मा के भीतर केवल ज्ञान का प्रकाश हो हजारों जीभ हो फिर भी अरिहंत प्रभु का गुणगान करना असंभव है। ३२ लाख देव विमानों को मालिक इंद्र भी परमात्मा के जन्म के मौके पर अपने देवी-देवताओं के परिवार सहित मेरु पर्वत पर जन्माभिषेक करते हैं। उनकी तरह हमें भी प्रतिदिन प्रभु का अभिषेक पूजन आदि करना चाहिए। सौधर्म इंद्र अपनी लघुता बताने के लिए बैल के रूप में अभिषेक करने पहुंचे थे। यह दर्शाते हुए कि वह बैल की तरह अल्प बुद्धि हैं।
आचार्य ने कहा कि अरिंहत परमात्मा के दो सर्वश्रेष्ठ गुण हैं पहला वीतराग और दूसरा सर्वज्ञ।
जीवन में आकस्मिक विकास करने के लिए आराध्य देव व सद्गुरू परमात्मा की छत्र छाया जरुरी है। मात्र चमत्कारों के आगे अपना सिर नहीं झुकाना है। दुनिया तो चमत्कार के आगे नमस्कार कर देती है। परंतु चमत्कार के आगे आकर्षित होकर अपने आराध्य देव व गुरू को स्थापित नहीं करना है।
यह नुकसान कुछ नहीं
आचार्य ने कहा कि भोजन में सब्जी बिगडऩे से स्वाद बिगड़ जाता है। महिने भर कड़ी मेहनत के बाद पगार नहीं मिले तो महिना बिगड़ जाता है और सीजन में बीमारी हो जाए और व्यापार प्रभावित हो तो वर्ष बिगड़ जाता है और यदि जीवन साथी सही नहीं है तो जीवन बिगड़ जाता है लेकिन यह नुकसान कुछ भी नहीं है।
देव रूठे तो सब रूठा
आचार्य ने कहा कि आराध्य देव और सद्गुरू की पसंद में भूल हो जाती है तो जन्मोजन्म बिगड़ जाते हैं। प्रभु को पसंद करने में हमें केवल बाह्य आकर्षण और चमत्कार ही नहीं देखने हैं वरन उनके गुणों को भी जानना है।
आचार्य ने कहा कि जैन धर्म व्यक्ति प्रधान नहीं है गुण प्रधान है जिनकी आत्मा में वीतराग व सर्वज्ञता है वह ही हमारे अराध्य देव हैं। जो वीतराग परमात्मा के द्वारा बनाए पंच महाव्रतों का दृढ़ता से पालन करते हुए कंचन कामनी का सर्वथा से त्याग करते हैं वह हमारे सद्गुरू के रूप में होने चाहिए।
जन्म व दीक्षा महोत्सव १३ से
प्रवचन के बाद संघ अध्यक्ष विपिन गुरू संघ के मूल नायक सुपाश्र्वनाथ के जन्म व दीक्षा दिवस के लिए १३ जून से शुरू होने वाले महोत्सव के तहत पहले दिन दीपक स्थापना, ज्वारारोपण मंगल विधान, १४ जून को सर्वोषधि से जन्माभिषेक, पंच कल्याणक पूजन, अठाहर पाप निवारण स्थानक भाव यात्रा व १६ जून को शांति स्नान महापूजन होगा। प्रवचन प्रतिदिन सुबह ९.३० बजे व पुरुषों के लिए रात्रि में नौ बजे रात्रि प्रवचन होंगे।

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