मुरम के लिए वन भूमि की पहाडिय़ों का मिटा रहे अस्तित्व

दमोह वन परिक्षेत्र की वन भूमि की पहाडिय़ां बदल रही समतल मैदान में

By: Rajesh Kumar Pandey

Published: 22 Jul 2021, 09:52 PM IST

दमोह. जिले में सड़कों के निर्माण के लिए वन भूमि से मुरम का अवैध खनन किया जा रहा है। जंगल व पहाड़ों पर खनन से पेड़, पौधों के अलावा पहाडिय़ों पर उगने वाले औषधीय पौधे भी समाप्त हो रहे हैं।
दमोह वन परिक्षेत्र के वृत बांसा की बीट इमलिया में मुरम का अवैध खनन किया जा रहा है। यह खनन प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत इमलिया से बलेह तक बन रही सड़क के साइड सोल्डर भरने के लिए किया जा रहा है। इमलिया बीट में नाली खोदकर मुरम निकाली गई। इसके बाद पहाड़ी को काटना शुरू कर दिया गया है, लगातार खनन करते हुए आधी पहाड़ी की मुरम खोद ली गई है। अब यह पहाड़ी धीरे-धीरे समतल मैदान में तब्दील हो जाएगी।
शहर की नजदीक से पहाडिय़ां गायब
वन व राजस्व भूमि में शहर के नजदीक कई छोटी बड़ी पहाडिय़ा थी। कोटातला, मारूताल, लाडऩबाग, आमचौपरा के अलावा उद्योग विभाग की जमीन के नजदीक कई पहाडिय़ां हुआ करती थीं। जो आज समतल मैदान में बदल गई हैं। इन पहाडिय़ों का अस्तित्व समाप्त करने के लिए आवासीय योजनाओं के अलावा सड़क निर्माण में मुरम खोदी गई। पहाडिय़ों का समूल नाश होता रहा और किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। शिकायत हुई टीम पहुंची तो उससे पहले मुरम माफिया फरार हो जाता है।
रेंजर पर किया था हमला
दमोह वन परिक्षेत्र में सबसे ज्यादा मुरम का अवैध खनन किया जा रहा है। एक साल पहले अवैध मुरम खोद रहे लोगों पर वन अमला कार्रवाई करने गया था, उस दौरान मुरम माफिया ने तत्कालीन दमोह रेंजर पर हमला कर दिया था, जिन्हें चोटें आने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस घटना के बाद भी वन विभाग ने अपनी सीमा में मुरम का अवैध खनन रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
बारिश के बाद उगती थी सफेद मूसली
बुजुर्ग बताते हैं कि दमोह शहर से लगी पहाडिय़ों के साथ ही बांसा वृत की पहाडिय़ों पर 20 साल पहले सफेद मूसली अपने आप ऊगती थी। यहां के आदिवासी बांसा के साप्ताहिक बाजार में मूसली की भाजी बेचने आते थे। जो सेहत के लिए इम्युनिटी बूस्टर हुआ करती थी। इसके अलावा शतावर सहित अन्य वनस्पतियां अपने उगने से लोग इनका उपयोग करते थे, लेकिन जबसे सड़कों के अलावा कॉलोनियों सहित अन्य निर्माण कार्य शुरू हुए तो मुरम के लिए छोटी-छोटी पहाडिय़ों का अस्तित्व समाप्त किया जा रहा है।
एक दो साल में गायब हो रही पहाड़ी
जानकार बताते हैं कि निर्माण कार्य के लिए मुरम खोदने के पहाड़ी के दूर पहले नाली जैसी खुदाई कर मुरम निकाली जाती है, फिर धीरे-धीरे पहाड़ी के नजदीक से मुरम निकालना शुरू किया जाता है। फिर धीरे-धीरे पहाड़ी के ईद-गिर्द लगे पेड़ों को अर्थमूवर से ढहा दिया जाता है। फिर एक दो साल में ही पहाड़ी गायब कर दी जाती है।
शिकायत पर नहीं होती कार्रवाई
नोहटा, नरसिंहगढ़, बनवार क्षेत्र, तेजगढ़ क्षेत्र में बन रही सड़कों के निर्माण के लिए वन भूमि से मुरम का अवैध खनन कराए जाने की शिकायतें भी की गई, कलेक्टर ने जांच के आदेश भी दिए लेकिन कार्रवाई नहीं की गई है। नरसिंहगढ़ नदी के किनारे से ही मुरम खोदकर छतरपुर-दमोह मार्ग के साइड सोल्डर भरे जा रहे हैं। अभाना से तेंदूखेड़ा तक बन रही सड़क की पुराई के लिए मुरम का उपयोग वन परिक्षेत्र की मुरम से ही किया गया है, शिकायतों के बाद एक भी मामले में कार्रवाई नहीं की गई है।

 
Rajesh Kumar Pandey Desk
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