सरकारी स्कूलों मे गिर रहा शिक्षा का स्तर, कम हो रही विद्यार्थियों की संख्या

सरकारी स्कूलों मे गिर रहा शिक्षा का स्तर, कम हो रही विद्यार्थियों की संख्या

Puspendra Tiwari | Publish: Aug, 12 2018 03:26:39 PM (IST) Damoh, Madhya Pradesh, India

हटा क्षेत्र की बद्तर है स्थिति

हटा. क्षेत्र में सरकारी प्राइमरी स्कूलों में दर्ज बच्चों की संख्या महज चार साल मे पांच हजार से अधिक गिर गई है। जबकि नगर व गावों के आस-पास निजी स्कूलों की संख्या बढ़ी है। साथ ही उनमें बच्चों की तादाद भी अधिक हुई है। यह सब आंकड़े आखिर क्या कहते हैं। पत्रिका पड़ताल में पता लगा कि प्राइमरी शिक्षा को लेकर आ रहा सामाजिक बदलाव इसकी वजह है। हालांकि कुछ अन्य कारण भी सरकारी स्कूलों से बच्चों को दूर ले जा रहे हैं।


कमजोर वर्ग के होने के बावजूद ज्यादातर परिवार अगली पीढ़ी को बेहतर शिक्षा देने के लिए कुछ भी करने को तैयार हंै। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की गैरहाजिरी शिक्षा के गिरते स्तर के कारण उनसे अभिभावकों का विश्वास टूटा है। यही कारण है कि ऐसे आंकडे सामने आ रहे हैं।

पांच साल मे पांच हजार बच्चे हुए कम -
2013-14 मे जहां 18890 के लगभग बच्चों के नामांकन प्राइमरी स्कूल मे हुए थे। वहीं 2017-18 मे यह आंकड़ा 13243 पर पहुंच गया। यानि पांच साल मे पांच हजार के करीब बच्चे कम हो गए हैं। सरकारी स्कूलों के हर वर्ष के आंकडे देखे जाएं तो 1500 से 2000 बच्चों का नामांकन हर साल कम हुआ है। जो निरंतर पांच सालों से जारी हैं। इसे सरकारी स्कूलों मे शिक्षा का स्तर गिरना माना जाए या फिर अभिभावकों का निजी स्कूलों के प्रति बढ़ता रुझान।
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी की साल दर साल घट रही संख्या के पीछे मुख्य कारण यह है कि गरीब परिवार भी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए निजी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं।
यह भी हैं कुछ कारण -
शिक्षकों की गैरहाजिरी, सरकार से लड़ाई, वेतन संबंधी मांगों को लेकर सरकारी स्कूलों के शिक्षक आए दिन हड़ताल पर रहते हैं। शिक्षकों की निर्वाचन मे ड्यूटी लगा दी जाती है। इसका सीधा प्रभाव पढ़ाई पर होता है। इसके अलावा लापरवाह शिक्षक पढ़ाने की बजाय स्कूलों से गैरहाजिर बने रहते हैं।
दो साल पहले तक एक बच्चे का नाम एक से अधिक स्कूलों में दर्ज रहता था। इस वजह से बच्चों की संख्या अधिक देखी गई। लेकिन जब सरकार ने चाइल्ड आईडी के जरिए मेपिंग कराई तो बच्चे एक ही स्कूल मे दर्ज हुए। इससे भी सरकारी स्कूलों में दर्ज बच्चों की संख्या में 10 प्रतिशत तक गिरावट आई। स्कूल भवनों का जर्जर होने, अभिभावकों मे दुर्घटना का अंदेशा होना एवं शिक्षा के स्तर मे निम्नता भी कारण हैं।


पहली से पांचवी तक के नामांकन-
शैक्षणिक वर्ष बालक बालिका योग
2014-15 8121 7770 15891
2015-16 7353 7032 14385
2016-17 7095 6860 13955
2017-18 6685 6557 13243
वर्तमान सत्र मे ब्लॉक के सरकारी स्कूलों मे 10671 छा़त्र एवं 10643 छात्राओं का नामांकन दर्ज हुआ है। यह आंकड़े पिछले सत्र की अपेक्षा भले ही ज्यादा हो लेकिन बढ़ती जनसंख्या एवं प्राइवेट स्कूलों मे बढ़ती छात्रों की संख्या के लिहाज से काफी कम है।
इनका कहना है-
हमारे द्वारा स्कूल स्तर पर बच्चों को सरकारी स्कूल तक लाने के व्यापक प्रयास किए जाते हैं। बहुत हद तक लोगों का पलायन भी इसके लिए जिम्मेदार है। इस शैक्षणिक वर्ष मे इस पर समीक्षा की जा रही है। शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए भी शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
टीआर कारपेंटर, बीआरसी हटा

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