सर्दी के मौसम में तेजी से इस बीमारी की चपेट में आ रहे बच्चे, हो जायें सावधान

सर्दी के मौसम में तेजी से इस बीमारी की चपेट में आ रहे बच्चे, हो जायें सावधान
बच्चों में बीमारी का खतरा बढ़ा

Ashish Kumar Shukla | Publish: Oct, 30 2017 05:26:55 PM (IST) | Updated: Oct, 30 2017 05:26:56 PM (IST) Deoria, Uttar Pradesh, India

चिल्ड्रेन वार्ड में प्रतिदिन 40 से 50 की संख्या में बच्चों को भर्ती कराया जा रहा है

देवरिया. पल-पल बदल रहे मौसम के मिजाज को देखते हुए अपने लाडले को संभाल कर रखें। शुरू हुई गुलाबी ठंड की चपेट में आकर बच्चे बीमारी का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी ये है कि लाडले की सेहत का पूरा खयाल रखकर उसे सुरक्षित रखा जाये।

चिल्ड्रेन वार्ड में बढ़ी बच्चों की संख्या
देवरिया जिले की बात करें तो जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में प्रतिदिन 40 से 50 की संख्या में बाल रोगियों को उल्टी, बुखार, निमोनिया व पेट दर्द की शिकायत पर भर्ती किया जा रहा है। ठंडक का आगाज हो चुका है। देर शाम लुढ़कते पारे के चलते जहां लोग ठंड से बचने की जुगत करने लगते हैं, वहीं दिन में हो रही तेज धूप लोगों को गर्म का एहसास भी कराती है।

गर्म और ठंड के बीच मासूमों का ध्यान रखने की अधिक आवश्यकता है। ठंड की चपेट में आने से मासूम निमोनिया का शिकार हो सकते हैं। बुखार आने या पेट में तेज दर्द होने की शिकायत पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें।

बाल रोग विशेषज्ञ ओपी पाठक की मानें तो बदल रहा मौसम मासूमों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में अभिभावकों को सावधानियां बरतने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों का खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए। उन्हें गर्म कपड़े पहनाते हुए ठंड से बचाने का हरसंभव प्रयास करना चाहिए।

बच्चों में निमोनिया के लक्षण
1- को सांस लेने में परेशानी का होना
2-घरघराहट की आवाज आनाऔर छाती में दर्द
3-नाखूनों का रंग नीला पड़ना
4-उल्टी आना
5- बदन में दर्द होना
6-थकान

कैसे करें बच्चों का बचाव- बाल चिकित्सक बताते हैं कि-
1-बच्चों को परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें
2- सर्दियों के मौसम में बच्चे को धूप में रखना चाहिए।
3-दूध में थोड़ा केसर मिलाकर बच्चे को दिन में दो बार पिलाएं
4-बच्चे को इस बीमारी से बचाने के लिए उसे वैक्सीन यानी टीका जरूर लगवाना चाहिए। यह न्यूमोनिया के खतरे को कम कर देता है।
5-वे बच्चे जो समय से पहले हो जाते हैं उन्हं न्यूमोनिया खतरा अधिक रहता है। इसलिए समय-समय पर बच्चों की डाक्टरी जांच जरूर करवानी चाहिए।

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned