किराए की टैक्सी में पहुंचे ‘बाराती’, फिर पता चला ये तो रेड पड़ी है

किराए की टैक्सी में पहुंचे ‘बाराती’, फिर पता चला ये तो रेड पड़ी है
किराए की टैक्सी में पहुंचे ‘बाराती’, फिर पता चला ये तो रेड पड़ी है

Hussain Ali | Updated: 12 Oct 2019, 03:32:15 PM (IST) Dewas, Dewas, Madhya Pradesh, India

  • देवास में छह फर्मों पर 40 अधिकारियों ने एकसाथ छापा मारा
  • टीम के पहुंचते ही मच गया हडक़ंप

देवास. कृषि उपज मंडी प्रांगण क्रमांक 2 में शुक्रवार को वाणिज्यिक कर विभाग की कार्रवाई हुई। राज्य कर (वाणिज्यिक कर) विभाग ने फर्जी फर्मों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल कर शासन को चूना लगाने का घोटाला पकड़ा है। विभाग की एंटी इवेजन विंग-ए ने छह फर्मों पर छापा मारा। बताया जा रहा है कि प्रारंभिक जांच में फर्मों के फर्जी होने की पुष्टि हुई है। टीम के पहुंचने से हडक़ंप मच गया। मामले की जानकारी को लेकर जीएसटी के अधिकारियों से बात करना चाही, लेकिन उन्होंने बात करने से मना कर दिया। मोबाइल पर भी संपर्क किया, लेकिन फोन नहीं उठाया।

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किराए की टैक्सी में बाराती बनकर आए

जानकारी के अनुसार वाणिज्यिक कर विभाग के करीब 40 अधिकारी-कर्मचारी देवास के एक होटल में किराए की टैक्सी से पहुंचे। होटल में भी यही कहा गया कि सभी लोग एक शादी समारोह में शामिल होने आए हैं। स्थानीय प्रशासन को ऊपरी स्तर पर सूचित किया गया था कि गोपनीय कार्रवाई होने वाली है। आधा दर्जन महिला अधिकारी भी साथ थीं।

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4 करोड़ का आईटीसी हासिल किया

संयुक्त आयुक्त (राज्य कर) मनोज चौबे की अगुवाई में अधिकारियों ने एक साथ छह फर्मों के कुल 12 ठिकानों पर दबिश दी। सूत्रों के अनुसार जांच में कम्प्यूटर रिकॉर्ड, दस्तावेज और कई बिल मिले हैं। इन सभी से पुष्टि हुई है कि ये सभी फर्में सिर्फ कागजों पर व्यापार दिखा रही थी। सभी फर्म सोयाबीन व सोया उत्पाद व डीओसी आदि की बिक्री दिखाती थीं।

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फर्जी तरीके से टैक्स की एंट्री कर आईटीसी हासिल किया था। इस आईटीसी को आगे तेल मिलों को फॉरवर्ड किया जा रहा था। तेल मिलें इस आईटीसी का लाभ ले रही थीं। प्रारंभिक जांच में ही फर्जी बिलों से 4 करोड़ का आईटीसी हासिल करने के तथ्य मिल चुके हैं।

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