पढ़ाई लिखाई के बावजूद छत्तीसगढ़ की 32 हजार युवतियों को नहीं मिल रहा अपने पैरों पर खड़े होने का मौका

पढ़ाई लिखाई के बावजूद छत्तीसगढ़ की 32 हजार युवतियों को नहीं मिल रहा अपने पैरों पर खड़े होने का मौका

Akanksha Agrawal | Updated: 16 Jul 2019, 11:27:42 AM (IST) Dhamtari, Dhamtari, Chhattisgarh, India

आज हजारों युवतियां स्नातक, स्नाकोत्तर, पीजीडीसीए आदि की डिग्री लेकर नौकरी की तलाश में घूम रही है। प्राइवेट सेक्टर में उन्हें निराश हाथ लग रही है।

धमतरी. पढ़ाई, लिखाई करने के बाद युवतियों को निराशा हाथ लग रही है। शासकीय नौकरी (Government job) नहीं मिलने के कारण उनका स्वयं के पैरों में खड़ा होने का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। ऐेसे में जिले में करीब 32 हजार युवतियां बरोजगारी का दंश झेल रही है।

शासन द्वारा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पर जोर दिया जा रहा है। इससे लोगों में नई चेतना आई है। बेटो के सामान बेटियों को भी सामान शिक्षा दी जा रही है। स्कूल और कालेजों में उनकी संख्या पहले से बढ़ गई है, लेकिन दूसरी ओर उन्हें नौकरी दिलाने के लिए कोई कारगार प्रयास नहीं किया जा रहा है।

आज हजारों युवतियां स्नातक, स्नाकोत्तर, पीजीडीसीए आदि की डिग्री लेकर नौकरी की तलाश में घूम रही है। प्राइवेट सेक्टर में उन्हें निराश हाथ लग रही है। जिले में राइस मिलों के अलावा और दूसरा कोई उद्योग, धंधा भी नहीं है। मुख्यमंत्री कौशल विकास विभाग से प्रशिक्षण लेने से हुनरमंद तो बन रहे हैं, लेकिन व्यवसाय करने के लिए बाजार उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। ऐसे में युवतियां की चिंता बढ़ गई है। वे पढ़ाई का खर्च भी नहीं निकाल पा रही है। अब उनकी उम्मीदें भूपेश सरकार पर टीक गई है।

नहीं दिया जाता तवज्जो
उल्लेखनीय है जिला रोजगार कार्यालय में हर महीने प्लेसमेंट कैंप का आयोजन किया जाता है। यहां विभिन्न कंपनियां द्वारा नौकरी पर रखने के लिए युवाओं से आवेदन मंगाया जाता है। सूत्रों की माने तो प्लसेमेंट कैंप में युवतियों को तवज्जो नहीं दिया जाता है। युवाओं को नौकरी पर रखा जाता है। ऐसे में कैंप में शामिल होने वाली युवतियों को मायूस होकर घर लौटना पड़ता है। अधिकारी उनके लिए प्राइवेट सेक्टर में नौकरी उपलब्ध कराने ध्यान नहीं दे रहे हैं। पढ़े, लिखे होने के बाद भी युवतियों को नौकरी मिलने पर उन्हें मजबूरी में घर का चौक-चूल्हा संभालना पड़ रहा है। अधिकांश परिजन तो कालेज की पढ़ाई करने के बाद अपनी बेटियों का घर बसाने के लिए हाथ पिला कर देते हैं।

क्या कहती हैं युवती
सरिता शाह शिक्षित बेरोजगारों की संख्या बढऩे से शासकीय नौकरी मिलना मुश्किल हो गया है। जिले में बड़े, उद्योग धंधा भी नहीं है। प्राइवेट नौकरी भी नहीं मिल रही है। ऐेसे में शासन को कुछ करना चाहिए।

हितेश्वरी गांव और शहर में स्कूल कालेज खुल गए हैं। इससे अब पढ़ाई करने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करना पड़ता। पढ़ाई, लिखाई के बाद युवतियों को नौकरी मिल सके, इसके लिए कारगार उपाय करना चाहिए।

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