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युवाओं का कौशल निखारने के लिए लाखों रुपए खर्च फिर भी हाथ में रोजगार नहीं

पढ़ाई के साथ ही युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ने के लिए जिले में हास्पिलिटी समेत सिलाई, ईएमटी, सिक्युरिटी गार्ड, कप्यूटर आदि ट्रेड में प्रशिक्षण को दिया गया, लेकिन प्लेसमेंट के मामले में विभाग गंभीरता नहीं दिखा रहा।

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धमतरी

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Ashish Gupta

Nov 24, 2021

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धमतरी. पढ़ाई के साथ ही युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ने के लिए जिले में हास्पिलिटी समेत सिलाई, ईएमटी, सिक्युरिटी गार्ड, कप्यूटर आदि ट्रेड में प्रशिक्षण को दिया गया, लेकिन प्लेसमेंट के मामले में विभाग गंभीरता नहीं दिखा रहा। यही वजह है कि प्लेसमेंट के बाद कुछ दिनों में ही काम छूट जा रहा हैं। मानिटरिंग के अभाव में हुनरमंद युवाओं का सपना पूरा नहीं हो पा रहा हैं।

उल्लेखनीय है कि बीते सालों में धमतरी में मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत एक संस्था के माध्यम से हॉस्पिटैलिटी ट्रेड में प्रशिक्षण में लाखों रुपए खर्च किया गया था, लेकिन इसका अपेक्षित परिणाम नहीं आया। सूत्रों के मुताबिक इस ट्रेड में अब तक करीब 1 हजार 684 युवाओं को प्रशिक्षण देने में 1 करोड़ 10 लाख रुपए खर्च हो चुका है, जबकि दूसरी ओर सिर्फ एक हजार 160 युवाओं को ही नौकरी मिल पाया है।

बताया गया है कि यह प्रशिक्षण कौशल विकास के तहत एक एनजीओ से ट्राईअप कर दिया गया था। बाद में मचे भारी बचाव के बाद मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना ने इस ट्रेड में प्रशिक्षण देना बंद कर दिया। धमतरी जिले में पढ़े-लिखे युवाओं को शासकीय नौकरी के पीछे न भागना पड़े, इसके लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना शुरू की है।

लाइवीहुड कालेज में वर्ष 2018-19 से जिले में इस योजना के तहत कम्प्यूटर, सुरक्षा गार्ड, सिलाई मशीन, ईएमटी, कम्यूटर आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण लाइवलीहुड कालेज में दिया जा रहा हैं। इन ट्रेड में प्रशिक्षण के लिए यहां 30-30 सीटें निर्धारित हैं, लेकिन यह सीट भर नहीं पाते। जबकि बाजार में अभी प्लंबर, रिटेल, एसी-फ्रिज, मोबाइल रिपेयरिंग, ड्राइवर, मैकेनिक आदि ट्रेड की भारी डिमांड हैं, लेकिन लाइवीहुड कालेज में अब तक इसका प्रशिक्षण शुरू नहीं हो सका हैं। ऐसे में युवाओं को इस फिल्ड में हुनरमंद बनने का मौका नहीं मिल पा रहा हैं।

उल्लेखनीय है कि कोरोना के कारण 13 मार्च से 1 अगस्त 2021 तक प्रशिक्षण कार्य स्थगित रहा, जिसके कारण वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2021-22 में लक्ष्य अनुरूप प्रशिक्षण कार्य संचालित नहीं हो सका। वर्तमान में स्पेशल प्रोजेक्ट के तहत इमरजेंसी मेडिक्ल टेक्नीशियन कोर्स में 30 हितग्राही तथा कम्यूटर में 20 हितग्राही व सुरक्षा गार्ड कोर्स में 25 हितग्राही कुल तीन बैच प्रशिक्षण ले रहे हैं।

हॉस्पिटैलिटी ट्रेड में हाथों में आई थी मायूसी
गौरतलब है कि हॉटलों में काम करने के लिए युवाओं की मांग अधिक है। इसलिए जिले में हॉस्पिटैलिटी ट्रेड में भी एक एनजीओ युवक और युवतियां का प्रशिक्षित किया जा रहा है। यहां उनके लिए रहने, खाने-पीने आदि की सुविधाएं है। बालोद, बस्तर, सरगुजा, रायपुर समेत अन्य पूरी राज्यभर से युवा यहां आते हैं। दो महीने तक उन्हें हॉटल में होने वाले कार्यों की पूरी जानकारी दी जाती है। साथ ही प्रशिक्षकों द्वारा उन्होंने ट्रेंड भी किया जाता है। प्रशिक्षण लेने के बाद प्लेसमेंट नहीं होने से आधिकांश युवाओं को मायूस होकर घर लौटना पड़ता है।

स्थानीय स्तर पर फोकस नहीं
हॉस्पिटैलिटी ट्रेड में प्रशिक्षण लेने वाले अधिकांश युवाओं ने बताया कि इस ट्रेड में प्रशिक्षण लेकर अब पछताना पड़ रहा है। युवा परसराम ध्रुव, कैलाश मरकाम, दिनेश्वरी साहू, रजनी ध्रुव का कहना है कि स्थानीय स्तर पर इसका कोई उपयोग नहीं है। दिल्ली, कलकत्ता, गोवा, मुंबई समेत विदेशों में इसकी मांग अधिक है। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी नहीं है कि वे विदेशों में जाकर नौकरी कर सके। अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर नौकरी देने के लिए कहा था, इसलिए उन्होंने प्रशिक्षण ले लिया।

परियोजना अधिकारी संदीप गोंडाले ने कहा, कौशल विकास योजना के तहत अभी हास्पीटीलीटी ट्रेड में प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद युवाओं को संस्था द्वारा प्लेसमेंट कराया जाता है।

साल दर साल प्रशिक्षण की स्थिति
वर्ष लक्ष्य प्रशिक्षित प्रशिक्षणरत योग नियोजन
2018-19 1510 772 0 772 734
2019-20 205 18 0 18 18
2020-21 120 0 20 20 0
2021-22 450 0 55 55 0
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योग- 2285 790 75 865 752
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(अब्दुल रज्जाक रिजवी की रिपोर्ट)