प्राइवेट अस्पतालों के लिए कमाई का जरिया बनी सरकार की यह योजना, मरीजों से हो रही लूट

आयुष्मान भारत योजना प्राइवेट अस्पताल संचालकों के लिए कमाई का जरिया बन गया है।

धमतरी. आयुष्मान भारत योजना प्राइवेट अस्पताल संचालकों के लिए कमाई का जरिया बन गया है। यहां 5 लाख रुपए तक नि:शुल्क इलाज शुरू होने से पहले ही सोनोग्राफी खून, ब्लड आदि की जांच के नाम पर गरीब मरीजों से हजारों रुपए वसूल लिया जाता है। पिछले एक साल में करीब 40 हजार मरीज इस योजना के तहत अपना इलाज करा चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि कैंसर, बे्रन समेत अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में हजारों रुपए खर्च हो जाता है। गरीब वर्ग इस तरह की बीमारियां होने पर वे आर्थिक परेशानियों के चलते समय पर अपना इलाज नहीं करा पाते। कई बार इससे उनकी मौत हो जाती है। केन्द्र सरकार ने उनको बेहतर आधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने केे उद्ेश्य से आयुष्मान भारत योजना शुरू किया है। जिले में इस योजना के 1 लाख 45 हजार हितग्राही हैं। इलाज के लिए जिला अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, स्वास्थ्य केन्द्र और 23 प्राइवेट अस्पताल अनुबंधित हैं। यहां अब तक 40 हजार मरीज लाभान्वित हो चुके हैं। जब से यह योजना शुरू है, तब से अधिकांश प्राइवेट अस्पताल संचालकों ने अपनी पॉलिसी ही चेंज कर कमाई का जरिया बना लिया है।

इस तरह चलता है खेल
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की माने तो प्राइवेट अस्पताल संचालक आयुष्मान भारत योजना शुरू होने के बाद दो तरह से कमाई कर रहे हैं। पहले पंजीयन कराने पर मरीजों से दो रुपए रुपए वसूल लिया जाता है। इसके बाद डॉक्टर बीमारी इलाज शुरू होने करने से पहले ब्लड, पेशाब, एड्स, सुगर, सोनोग्राफी आदि की जांच कराने के लिए पर्ची थमा देते हैं। इससे मरीजों का जांच के नाम पर ही दो हजार रुपए तक खर्च हो जाता है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही डॉक्टर, आयुष्मान योजना से नि:शुल्क इलाज कराने के लिए मरीजों को भर्ती करते हैं।

ये हैं योजना में शामिल
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आयुष्मान भारत योजना से मरीजों को लाभान्वित करने के लिए शासन ने मापदंड निर्धारित किया है। इसमें तय मापदंड में एक कमरे वाले कच्चे मकान, आवास और भूमिहीन, आर्थिक रूप से कमजोर, जिसका कोई आश्रित न हो आदि को आयुष्मान योजना में शामिल किया गया है।

पड़ताल में आई सच्चाई सामने
पत्रिका टीम ने गुरूवार को बस स्टैंड, कलक्ट्रेट पहुंच मार्ग समेत अन्य स्थानों में जाकर आयुष्मान योजना से लाभान्वित होने वाले मरीजों से पड़ताल की। कांकेर से इलाज कराने पहुंचे मनोज नेताम ने बताया कि पेट में असहनीय दर्द हो रहा है। डॉक्टर ने भर्ती करने से पहले आवश्यक टेस्ट कराने कहा था। सोनोग्राफी कराने में ही 8 सौ रुपए खर्च हो गया है। अब उनके पास जेब में पैसे नहीं है। बालोद के सुखेन्द्र देवांगन ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत वह पेट से संबंधित बीमारी का इलाज कराने आया था। सोनोग्राफी, इसीजी कराने के लिए पैसे नहीं होने कारण वह वापस लौट रहा है।

स्वास्थ्य विभाग को चिंता नहीं
आयुष्मान भारत योजना से इलाज शुरू करने के लिए अनुमति देने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह फेर लिए हैं। शासन के आदेश के बाद भी नियमित रूप से प्राइवेट अस्पतालों की मानिटरिंग नहीं कर रहे हैं, जिसका खामियाजा आज गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जिसके चलते शासन के उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो रही है।

सीएमएचओ डॉ. डीके तुर्रे ने बताया कि आयुष्मान योजना का लाभ हितग्राहियों को मिल रहा है। अस्पताल में भर्ती होने पर ही इसका लाभ मिलता है।

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Akanksha Agrawal
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