ब्रह्माण्ड के सभी मंत्रों का राजा हैं यह महामंत्र, इसके जपने से मिल जाता है सभी मंत्रों का फल- गायत्री जयंती विशेष

ब्रह्माण्ड के सभी मंत्रों का राजा हैं यह महामंत्र, इसके जपने से मिल जाता है सभी मंत्रों का फल- गायत्री जयंती विशेष

Shyam Kishor | Publish: Jun, 21 2018 11:58:42 AM (IST) धर्म कर्म

ब्रह्माण्ड के सभी मंत्रों का राजा हैं यह महामंत्र, इसके जपने से मिल जाता है सभी मंत्रों का फल

गायत्री जयंती विशेष

हिंदू धर्म शास्त्रों में विशेष उल्लेख आता हैं कि सभी वेदों की उत्पत्ति, सभी देवों की उत्पत्ति एवं संपूर्ण विश्व ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति माँ गायत्री के गर्भ से ही हुई हैं इसलिए गायत्री माता को सृष्टि का आधार वेदमाता, विश्वमाता और देवमाता भगवती ऋतंभरा माँ गायत्री कहा जाता हैं ।

 

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथी के दिन ब्रह्मा जी के आवाहन पर मानव मात्र के उद्धार के लिए माँ गायत्री धरती पर सद्ज्ञान के रुप में अवतरित हुई थी, तभी से इस दिन को गायत्री जंयती के रूप में मनाया जाता हैं ।

 

सभी मंत्रों का राजा हैं 24 अक्षरों वाला गायत्री महामंत्र


।। ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात ।।

मंत्र का अर्थ- उस प्राण स्वरूप, दुःख नाशक, सुख स्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम सब (मानव मात्र) अपनी अंर्तात्मा में धारण करें । वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करें ।


गायत्री साधना से मनवांछित फल की प्राप्ति होती हैं, 24 अक्षरों वाले इस वेद मंत्र में अद्वतिय शक्ति हैं जो व्यक्ति नियमित ब्रह्ममुहूर्त में गायत्री मंत्र का जप, साधना, उपासना करता है माँ गायत्री उसके सभी कष्ट हर लेने के साथ साधक के भीतर देवत्व की स्थापना कर सदज्ञान और सदबुद्धि की वृद्धि करती हैं, एवं जो नियमित गायत्री महामंत्र के जप के बाद इसी मंत्र की गाय के घी से 108 बार यज्ञ में आहुति देता हैं, उसके सभी दुखों का नाश होने के साथ, मान सम्मान के साथ धन वैभव की भी मन चाही प्राप्ति हो जाती हैं । इसलिए तो वेदों में गायत्री को माता और यज्ञ को पिता कहा गया हैं ।

 

 

gayatri jayanti

अथर्ववेद में कहा गया कि गायत्री मंत्र जप से आयु, प्राण, प्रजा, पशु, कीर्ति, धन एवं ब्रह्मवर्चस आदि सात प्रतिफल स्वतः ही प्राप्त हो जाते हैं, जो भी विधिपूर्वक श्रद्धा, विश्वास और पूर्ण पवित्रता के साथ उपासना करते हैं माँ गायत्री एक रक्षा कवच का निर्माण करती है व विपत्तियों के समय उसकी रक्षा करने साथ अंत में साधक को ब्रह्मलोक अपनी शरण में ले लेती हैं ।


इस सदी में गायत्री मंत्र, गायत्री यज्ञ, एवं सर्व सुलभ साधना को जन-जन तक पहुंचाने वाले युगऋषि आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने लिखा हैं- महामंत्र जितने जग माही, कोऊ गायत्री सम नाही । अर्थात- अन्य सभी मंत्रों की उत्पत्ति भी गायत्री के गर्भ से ही हुई है इसलिए गायत्री मंत्र को सभी मंत्रों का राजा और गुरू मंत्र कहा गया हैं, वेदों में तो यहां तक कहा गया हैं कि गायत्री मंत्र की साधना करने से सभी मंत्रों के जपने का लाभ स्वतः ही मिल जाता है, ब्रह्मर्षि विश्वामित्र जी को गायत्री का प्रथम ऋषि कहा जाता हैं जिन्होंने गायत्री मंत्र की साधना के बल पर दूसरी सृष्टि का निर्माण किया था ।

 

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पांच मुखों वाली माँ गायत्री


हिंदू धर्म में माँ गायत्री को पंचमुखों वाली भी माना गया है जिसका अर्थ है कि यह संपूर्ण ब्रह्माण्ड- जल, वायु, पृथ्वी, तेज और आकाश के पांच तत्वों से बना है, संसार में जितने भी प्राणी हैं, उनका शरीर भी इन्हीं पांच तत्वों से बना है, इस पृथ्वी पर प्रत्येक जीव के भीतर गायत्री माता प्राण-शक्ति के रूप में प्रकाशित और विद्यमान है ।

 

यही कारण है गायत्री को सभी शक्तियों का आधार माना गया है, क्योंकि भगवान श्रीराम, कृष्ण सहित सभी देवता भी नित्य गायत्री मंत्र की उपासना करते है ऐसा उल्लेक गायत्री महाविज्ञान ग्रंथ में आता हैं, इसीलिए भारतीय संस्कृति में आस्था रखने वाले हर प्राणी को प्रतिदिन गायत्री उपासना अवश्य करनी चाहिए ।

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