
फाल्गुन कृष्ण अमावस्या शनिवार को शनिश्वरी अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी। इस दौरान ग्रहों का योग संयोग भी खास रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं.दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि शनिश्चरी अमावस्या पर चतुर्ग्रही योग कुंभ राशि में बनेगा। शर्मा ने बताया कि सूर्य, चंद्र बुध और शुक्र कुंभ राशि में रहेंगे। शर्मा ने बताया कि वहीं रविवार से मीन संक्रांति की शुरूआत होगी।
रविवार की शाम 6.04 बजे सूर्यदेव कुंभ राशि को छोडक़र मीन राशि में प्रवेश करेंगे। मीन राशि में प्रवेश करने से शुभ कार्य वर्जित होंगे। हालांकि इससे पहले शुक्र का तारा अस्त होने से शुभ कार्य बंद है। एक महीने की अवधि को मीनमलमास कहा जाता है, इसकी अवधि 13 अप्रेल तक रहेगी। परंतु शुक्र का तारा इससे आगे तक अस्त रहेगा। अत: शुभ कार्य एक बार फिर से 20 अप्रेल के बाद शुरू होंगे। 15 मार्च को अबूझ सवा फुलेरा दोज का रहेगा।
ये करें उपाय
पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि शनिदेव का अभिषेक सरसों के तेल से करें। काले तिल, काले वस्त्र, उड़द की दाल, लोहे का सामान, छतरी, जूते, कंबल, सरसों का तेल आदि का दान करना विशेष फलदायी माना गया है। ज्योतिषाचार्य पं.राजेंद्र शर्मा ने बताया कि संवत्सर—2077 की अंतिम शनि अमावस्या रहेगी।
इन उपायों से भी बदलेगा भाग्य
शनिश्चरी अमावस्या पर किए जाने वाले उपाय तुरंत अपना असर दिखाते हैं। आप भी ऐसे ही कुछ उपायों को अपना कर अपना भाग्य संवार सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में
1. अपने पितरों की शांति के निमित्त तर्पण तथा श्राद्ध करें। इससे उनका आशीर्वाद प्राप्त होगा और आपके घर में सुख-शांति आएगी।
2. गरीबों को वस्त्र, भोजन आदि दान दें तो भी कष्टों में कमी आएगी।
3. सबसे आखिर में अपने कर्मों का विशेष ध्यान रखें। अगर आप अपने कर्म अच्छे रखेंगे तो भाग्य भी निश्चित ही अच्छा रहेगा। अच्छे कर्म के दम पर बुरा भाग्य भी बदला जा सकता है।
Published on:
13 Mar 2021 08:39 am
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