जन अनुशासन पखवाड़े में नहीं दिखा अनुशासन, खानापूर्ति बन रहा पखवाड़ा

राजाखेड़ा. हर पल खतरनाक होते कोरोना के बीच व्यापारियों द्वारा कफ्र्यू का उल्लंघन कर चोरी छिपे छोटी दुकानो में भीड़ को एक साथ घुसा कर शटर बन्द कर करवाई जा रही सावों की खरीददारी क्षेत्र में बढ़े कोरोना विस्फोट को आमंत्रित कर रही है, लेकिन राजनीतिक दखलंदाजी से पस्त प्रशासन और लापरवाह पुलिसिया कार्यप्रणाली के

By: Naresh

Updated: 19 Apr 2021, 09:17 PM IST

जन अनुशासन पखवाड़े में नहीं दिखा अनुशासन, खानापूर्ति बन रहा पखवाड़ा
- बढ़ा खतरा हो सकता है आरम्भ
- चोरीछिपे दुकानों में भर रहे ग्राहक
- सावे में व्यापारियों की मजबूरी या लालच
राजाखेड़ा. हर पल खतरनाक होते कोरोना के बीच व्यापारियों द्वारा कफ्र्यू का उल्लंघन कर चोरी छिपे छोटी दुकानो में भीड़ को एक साथ घुसा कर शटर बन्द कर करवाई जा रही सावों की खरीददारी क्षेत्र में बढ़े कोरोना विस्फोट को आमंत्रित कर रही है, लेकिन राजनीतिक दखलंदाजी से पस्त प्रशासन और लापरवाह पुलिसिया कार्यप्रणाली के चलते राज्य सरकार द्वारा घोषित कफ्र्यू क्षेत्र में बेमानी होता जा रहा है। जो एक बड़े खतरे को आमंत्रित कर रहा है। गौरतलब तथ्य यह है कि पूर्व वर्ष में कोरोना की पहली लहार के दौरान भी इसी प्रकार की कारगुजारियों से बड़ी संख्या में बड़े व्यापारी संक्रमित भी हुए थे और जान से भी हाथ धो बैठे थे, लेकिन उस सबसे सबक लेने को कोई भी तैयार नहीं है।
क्या हैं हालात
दो दिन के पूर्ण कफ्र्यू में तो व्यापारियों का धैर्य बना रहा, लेकिन रविवार को राज्य सरकार के 3 मई तक कफ्र्यू के आदेश के बाद के बाद सोमवार को जब बाजार खुला तो व्यापारियों का धैर्य जबाव दे गया और बाजार खुलने लगा। वहीं ग्रामीणों की उमड़ती भीड़ ने उनको उत्साहित कर दिया। जिसके बाद ग्राहकी जोर पकडऩे लगी। तभी उपखण्डाधिकारी, तहसीलदार ओर थानाधिकारी के दल ने राज्य सरकार की गाइड लाइन के विपरीत खुली दुकानों को बन्द करवा दिया।
वापस लौटते ही बदले हालात
जैसे ही दल वापस लौटा दुकानदारों ने खरीददारों को एकत्रित करना आरंभ कर दिया और मौका मिलते ही शटर उठाकर उन्हें अंदर कर देते। उनकी खरीददारी पूरी होते ही एक साथ उन्हें वापस निकाल देते और बाहर आकर पुन: ग्राहकों को एकत्रित करना आरंभ कर देते। ऐसे में बाहर से तो दुकानें बंद दिखती, लेकिन उनमें अंदर भारी भीड़ जमा होकर खरीददारी तो करती, लेकिन कोरोना फैलने का बड़ा अवसर भी पैदा कर देती। सावों के चलते कपड़ों, रेडीमेड, सौंदर्य प्रसाधनों की दुकानों में ये भीड़ ज्यादा केंद्रित रही।
सिफारिशें कर रही हालात खराब
हालांकि स्थानीय प्रशासन ने कई बार कुछ व्यापारियों को पकड़ा, लेकिन राजनीतिक रसूख वाले व्यापारी अपने आकाओं से फोन करवाकर बच गए। जिससे अन्य व्यापारियों को भी मौका मिल गया और प्रशासन भी पस्त होकर खामोश बैठ गया।
कालाबाजारी भी चरम पर
व्यापारियों को इन हालात का आभास था और उसके चलते उन्होंने पहले से ही आवश्यक सामान का स्टॉक करना आरंभ कर दिया था। जैसे ही लॉकडाउन की खबरें आई, लगभग सभी व्यापरियों ने वस्तुओं के मनमानी दरें वसूल करना आरम्भ कर दिया। खास तौर से जिन दुकानो को खोलने के आदेश नहीं थे, उन्होंने तो जमकर इस अवसर का लाभ उठाया। बड़े परचूनी व्यापारियों ने तो सोमवार को दुकानें ही नहीं खोली और बाजार में स्टॉक रीतने का इंतजार करते रहे। जिससे कृतिम कमी का पूरा लाभ उठाया जा सके।

मास्क सिर्फ पुलिस के डर से
कागजों में चले कोविड जागरूकता अभियान के चलते लोगों में कोविड के खतरे के प्रति जागरूकता नहीं है। लोग सिर्फ पुलिस के डर से ही मुंह ढक रहे हैं, सामाजिक दूरी का तो लोग मतलब ही नहीं जानते। परचूनी की दुकानों पर लोग धक्का-मुक्की करते नजर आए।

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