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यात्रियों की तकलीफ से रेलवे को नहीं वास्ता, असहाय व बुजुर्गों का निकलना हुआ मुश्किल

locationधौलपुरPublished: Dec 01, 2023 06:06:48 pm

Submitted by:

Naresh Lawaniyan

धौलपुर. यात्री सुविधाओं के लिए फिकरमंद रेलवे प्रशासन धौलपुर में अंाखे मंूद कर बैठा हुआ है। यहां करोड़ों की लागत से कार्य हो रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी रेलवे जरा सा सुविधाजन रास्ता देने में फेल साबित हो रहा है।

 Railways is not concerned with the problems of passengers, it is difficult for helpless and elderly people to evacuate
धौलपुर. यात्री सुविधाओं के लिए फिकरमंद रेलवे प्रशासन धौलपुर में अंाखे मंूद कर बैठा हुआ है। यहां करोड़ों की लागत से कार्य हो रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी रेलवे जरा सा सुविधाजन रास्ता देने में फेल साबित हो रहा है। हालांकि, रेलवे का कहना है कि यात्री नवीन एफओबी से आ-जा सकते हैं। लेकिन हकीकत में नवीन एफओबी मुख्य सडक़ और सर्कुलेटिंग एरिया में दूरी है। भागते-दौड़ते आने वाले यात्री के लिए तो ट्रेन को पकडऩा असंभव है और बुजुर्ग और असहाय यात्रियों के लिए लम्बे-चौड़े एफओबी पर चढऩा और फिर उतरना किसी मुसीबत से कम नहीं है। अगर कोई असहाय जाना भी चाहे तो व्हीलचेयर की सुविधा बोर्ड पर तो लिख रखी है लेकिन यहां कोई उपलब्ध कराने वाला नहीं है। जो बुजुर्ग या असहाय अकेले आ-जा रहे हैं उन्हें सबसे अधिक तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।
यात्रियों को हो रही परेशानी एक-आध सप्ताह से नहीं बल्कि कुछ महीनों से बरकरार है। छोटे स्टेशन पर बड़ी एजेंसियों अपने मुताबिक कार्य कर रही हैं। उन्हें यात्रियों को तकलीफों से जरा भी मतबल नहीं है। रेलवे बस एक ही बात कहता है कि यात्रियों के लिए पहले ही एलओबी तैयार करा दिया है और यात्रियों का इसका उपयोग करना चाहिए। लेकिन यात्री इससे जाने से बच रहे हैं। इसकी वजह अधिक दूरी है। आगरा मण्डल में बैठे आला अधिकरियों को यात्रियों को हो रही असुविधा को लेकर ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा है। बता दें कि स्टेशन के बाहर की तरफ रेलवे लाइन बिछाने समेत अन्य कार्य चल रहे हैं। गत दिनों भूमिगत केबल बिछाने के लिए गड्ढे खोद दिए। जो यात्री जैसे-तैसे निर्माण कार्य के बीच से होकर आसान रास्ते से निकल रहे थे, वह अब हादसे संभावना बढ़ा रहा है। जबकि रेलवे यहां पर गड्ढे के ऊपर कोई पट्टी रखकर रास्ता दे सकता है लेकिन फिलहाल स्थानीय अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।

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