script लापरवाही के कारण जिले में करोड़ों रुपए की लागत से बने अमृत सरोवर सूखे | Due to negligence, Amrit Sarovar built at a cost of crores of rupees d | Patrika News

लापरवाही के कारण जिले में करोड़ों रुपए की लागत से बने अमृत सरोवर सूखे

locationडिंडोरीPublished: Feb 05, 2024 01:21:23 pm

Submitted by:

shubham singh

गर्मी में गहराएगा जल संकट, अतरिया, बीजापुरी के अमृत सरोवरों से उड़ रही धूल

Due to negligence, Amrit Sarovar built at a cost of crores of rupees dried up in the district.
Due to negligence, Amrit Sarovar built at a cost of crores of rupees dried up in the district.

डिंडौरी. जिले के सातों जनपद पंचायत में अमृत सरोवर योजना के तहत लगभग 101 तालाब निर्माण कराए गए हैं। लेकिन सही मानिटरिंग न होने के चलते सभी तालाब गर्मी आने से पहले ही सूख गए हैं। यांत्रिकी सेवा विभाग के माध्यम से जिले भर में अमृत सरोवर योजना तालाब का निर्माण कराया गया जो विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़़ गए। मामला प्रशासन के संज्ञान में होने के बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में हैं।
तालाबों में पानी की एक बूंद नहीं
गर्मी के दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट से निपटने और भू-जल स्तर को बनाए रखने के सरकार ने अमृत सरोवर योजना की शुरूआत की। योजना के तहत जिले में तालाब भी बन गए, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की आहट होने लगी है। ग्राम पंचायत सरहरी, अमरपुर जनपद के ग्राम पंचायत बहेरा, रमपुरी के तालाब सहित समनापुर जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत अतरिया बीजापुरी में लाखों रुपए की तालाब में एक बूंद पानी नहीं है। इन तालाबों से धूल उड़ रही है, न तो ये सरोवर क्षेत्र का जल स्तर बढ़ाने में कामयाब हुए और न ही जल संग्रहण के काम आ सके। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिले में इस योजना के तहत बनाए गए अमृत सरोवरों पर करोड़ों रुपए की राशि खर्च हो गई है, अधिकांश सरोवर पूर्ण हो चुके हैं, तालाब सूखे पड़े हुए हैं। यदि इन तालाबों में पानी होता तो गर्मी के दिनों में पशु पक्षियों को राहत मिल पाती। लेकिन जिले में योजना मूल उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर सकी।
आपसी गठजोड़ से कार्य में लापरवाही
अमृत सरोवर तालाब जो नवंबर, दिसंबर में सूख गए हैं वो बरसात के पानी से लबालब भरा हुआ था। लेकिन पटल के नीचे से पानी का लगातार रिसाव होने के कारण गर्मी से पहले तालाब सूख गया। जिसे देखकर लगता हैं की ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के जिम्मेदारों ने ठेकेदार से आपसी गठजोंड़ कर शासकीय राशि का दुरुपयोग कर दिया। बताया गया कि आर्थिक लाभ पहुंचाने के चक्कर में गुणवत्ताहीन तालाब का निर्माण कराया गया। जिसकी वजह से जिले में करोड़ों रुपए खर्च के बावजूद तालाब में पानी नहीं है। जानकारों की माने तो मुरमी पहाड़ी होने के साथ ही पानी का कोई जीवित जल स्त्रोत नहीं होने के कारण भविष्य में भी यह तालाब अनुपयोगी ही साबित होगी। तालाब से लगातार पानी का रिसाव हो रहा था। जिसको जिम्मेदारों ने ठीक नहीं किया।

ट्रेंडिंग वीडियो