
इसमें हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। तकलीफ बढ़ने पर मरीज को बार-बार फे्रक्चर की दिक्कत हो सकती है।
शरीर में कैल्शियम व मिनरल्स की कमी से 60 या अधिक उम्र में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या हो सकती है। इसमें हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। तकलीफ बढ़ने पर मरीज को बार-बार फे्रक्चर की दिक्कत हो सकती है।
जांच : शुरुआती स्टेज में लक्षणों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए विशेषज्ञ टेक्सा स्कैन जांच करवाते हैं। लेकिन मरीज यदि बार-बार के फ्रेक्चर की परेशानी से पीड़ित है तो किसी भी टैस्ट की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि यह निश्चित रूप से ऑस्टियोपोरोसिस का ही लक्षण है।
क्या है इलाज : बार-बार फ्रेक्चर की स्थिति में हड्डियों की मजबूती के लिए मरीज को टेरीपैराटाइड दवा रोजाना इंजेक्शन से दी जाती है। कोर्स दो साल का व खर्च करीब 5000 प्रतिमाह आता है। शुरुआती स्टेज में विशेषज्ञ एहतियात के तौर पर छह महीने से एक साल तक इसका कोर्स करने की सलाह देते हैं।
ये भी ध्यान रहे -
द्नियमित वॉक व हल्के-फुल्के व्यायाम करें।
अधिक तली-भुनी चीजें खाने से परहेज करें।
दूध व दूध से बने पदार्थ खाएं।
फल व हरी सब्जियां अधिक से अधिक लें।
डॉक्टर द्वारा निर्देशित दवाएं समय से लें।
Published on:
17 Jun 2019 02:21 pm
