इन कारणों से होता है सडन कार्डियक अरेस्ट, जा सकती है जान, जानें लक्षण

इन कारणों से होता है सडन कार्डियक अरेस्ट, जा सकती है जान, जानें लक्षण

Vikas Gupta | Publish: May, 14 2019 05:01:31 PM (IST) डिजीज एंड कंडीशन्‍स

सडन कार्डियक अरेस्ट (एससीए) हृदय की ऐसी स्थिति है जिसमें धड़कनें सामान्य (60-100 प्रति मिनट) से 300-400 तक हो जाती हैं

सडन कार्डियक अरेस्ट (एससीए) हृदय की ऐसी स्थिति है जिसमें धड़कनें सामान्य (60-100 प्रति मिनट) से 300-400 तक हो जाती हैं और ब्लड प्रेशर अचानक गिरने लगता है। साथ ही हृदय की विद्युतीय तरंगों में अनियमितता आ जाती है। ऐसे में हृदय की पंपिंग प्रक्रिया प्रभावित होने से रक्त अन्य अंगों तक नहीं पहुंचता है।

प्रमुख कारण -
हार्ट अटैक के ज्यादातर मामलों में एससीए वजह नहीं होता लेकिन एससीए (सडन कार्डियक अरेस्ट) के अधिकतर केस हार्ट अटैक के कारण हो सकते हैं। रोग का कारक हृदय की धमनियों में असमानता है।

इन्हें खतरा -
आनुवांशिक रूप से यदि किसी के परिवार में 50 से कम उम्र में ही एससीए की वजह से मौत हुई हो उनमें इसकी आशंका ज्यादा होती है। जिन्हें कोरोनरी आर्टरी डिजीज (हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज) की वजह से हार्ट अटैक हुआ हो या डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान व शराब पीने वालों को इसका अधिक खतरा रहता है।

मुख्य लक्षण-
10% हार्ट पेशेंट्स या अन्य लोगों में दिल की धड़कन बढऩे, चक्कर, बेहोशी या पसीना आने, घबराहट, हृदय के अचानक सिकुडऩे से सांस लेने में तकलीफ, आंखों के सामने अंधेरा छाने, सीने में दर्द जैसी परेशानियां होने लगती हैं।

ऐसे करें बचाव -
ध ड़कनों के अनियमित होने की स्थिति में हृदय को इलेक्ट्रिक शॉक देकर इन्हें नियंत्रित किया जाता है। इसके अलावा जिन लोगों को एससीए का खतरा ज्यादा होता है, बचाव के रूप में उनके लिए आईसीडी काफी उपयोगी होती है। इनर्ट मैटल से तैयार यह डिवाइस त्वचा को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाती। इसे सीने की वॉल पर त्वचा में लगाया जाता है जिसके तारों को हृदय से जोड़ दिया जाता है। इस डिवाइस में एक चिप होती है जो दिल की हर धड़कन को मॉनिटर करती है। जैसे ही दिल की धड़कनें असामान्य होने लगती हैं यह हृदय को तुरंत एक झटका देकर उन्हें सामान्य कर देती है। यह झटका सामान्य रूप से 40 जूल का होता है।

सतर्कता है जरूरी-
आईसीडी डिवाइस लगने के बाद मरीज खेलों, एक्सरसाइज या भारी वजन उठाने से बचें वर्ना डिवाइस पर चोट लगने से रक्त के थक्के जमने की आशंका बढ़ जाती है।

सावधानी -
डॉक्टर से नियमित चेकअप कराते रहें व दवाएं व एक्सरसाइज को न छोड़ें। डाइट में अखरोट, बादाम, मौसमी फल व हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध, दही आदि लें।

संकेतों पर रखें नजर -
एससीए से पहले कोई खास संकेत नजर नहीं आते और मरीज की धड़कनें किसी भी समय अनियमित हो सकती हैं। एससीए के तुरंत बाद 3-6 मिनट में सीपीआर (हाथों से दबाव बनाना) या इलेक्ट्रिक शॉक न दिया जाए तो अवस्था जानलेवा हो सकती है। 80% से अधिक लोग इस रोग को गंभीरता से नहीं लेते व हृदय गति तेज होने पर हार्ट अटैक समझ लेते हैं जो गलत है।

कौनसी जांच जरूरी -
कमजोर हृदय या पूर्व में हार्ट अटैक झेल चुके मरीजों को समय-समय पर नियमित ईकोकार्डियोग्राफी (हृदय की अल्ट्रासाउंड) जांच करवानी चाहिए। जिन्हें एससीए हो चुका हो वे ईकाकार्डियोग्राफी व ईसीजी जांच करवाएं। हृदय की पंपिंग की सामान्य क्षमता 60% होती है व ईकोकार्डियोग्राफी जांच में यदि यह क्षमता 35% या कम आए तो एससीए की आशंका अधिक रहती है।

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