हजारों कार्मिक नहीं चुन पाएंगे अपने पंच-सरपंच

पंचायतीराज चुनाव प्रक्रिया की खामियों के चलते हर बार ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों कार्मिक अपने ही पंच-सरपंच चुनने के लिए मतदान नहीं कर पाते। इस बार पंच-सरपंच नामांकन के एक सप्ताह बाद मतदान होना है, इसके बावजूद डाक मत पत्र का प्रावधान नहीं किए जाने से प्रदेश भर में चुनाव ड्यूटी में लगने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों कार्मिक मतदान से वंचित रहेंगे।

By: Vinay Sompura

Published: 06 Jan 2020, 11:18 AM IST

हजारों कार्मिक नहीं चुन पाएंगे अपने पंच-सरपंच
- चुनाव ड्यूटी में लगे कार्मिक नहीं कर सकेंगे मतदान
- इस बार पहले नामांकन के बावजूद निर्वाचन आयोग ने नहीं किया डाक मत पत्रों का प्रावधान
- पंचायतीराज चुनाव
- विनय सोमपुरा
डूंगरपुर.
लोकतंत्र में एक-एक वोट का महत्व है। निर्वाचन आयोग भी हर चुनाव से पहले मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलता है, लेकिन पंचायतीराज चुनाव प्रक्रिया की खामियों के चलते हर बार ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों कार्मिक अपने ही पंच-सरपंच चुनने के लिए मतदान नहीं कर पाते। इस बार पंच-सरपंच नामांकन के एक सप्ताह बाद मतदान होना है, इसके बावजूद डाक मत पत्र का प्रावधान नहीं किए जाने से प्रदेश भर में चुनाव ड्यूटी में लगने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों कार्मिक मतदान से वंचित रहेंगे।

प्रदेश में 65 हजार कार्मिकों की लगेगी ड्यूटी
प्रदेश में 9171 ग्राम पंचायतों में चार चरणों में चुनाव होने हैं। प्रदेश के 34525 बूथों पर मतदान होना है। इसके लिए निर्वाचन विभाग ने 65 हजार से अधिक कार्मिकों की सेवाएं अधिग्रहित की हैं। डूंगरपुर जिले की ३५३ ग्राम पंचायतों के पंच-सरपंच का चुनाव दो चरणों में होना है। जिले में कुल 983 मतदान बूथ हैं। प्रत्येक बूथ पर आरओ, पीआरओ, चार पीओ तथा सुरक्षा कर्मियों सहित औसतन 8 कार्मिक नियुक्त किए जाएंगे। इस हिसाब से तकरीबन 8000 कार्मिकों की ड्यूटी मतदान दल के रूप में रहेगी। इसके अलावा रिजर्व दल, निर्वाचन संबंधी अन्य प्रकोष्ठों में आदि कामों में भी कार्मिकों की नियुक्ति की गई है। इनमें से ज्यादातर कार्मिक ग्रामीण क्षेत्र के निवासी हैं। यह कार्मिक अपनी ही पंचायत के पंच-सरपंच के निर्वाचन का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। हालांकि चरण बद्ध चुनाव के चलते इनमें से कुछ कार्मिक अपने मताधिकार का उपयोग कर सकेंगे।

पंच-सरपंच के लिए नहीं डाक मत पत्र का प्रावधान
निर्वाचन विभाग की ओर से जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव में तो डाक मत पत्र की व्यवस्था की जाती है, लेकिन पंच-सरपंच के लिए इसका प्रावधान नहीं है। इसका कारण यही रहता है कि पंच-सरपंच के लिए नामांकन एक दिन पहले होता है तथा मतदान के तुरंत बाद मतगणना शुरू हो जाती है। पहले से प्रत्याशी का निर्धारण नहीं होने से डाक मत पत्र भी नहीं बन पाते।


इस बार भी व्यावहारिक समस्या
प्रदेश में इस बार पंचायतीराज चुनाव के तहत फिलहाल सिर्फ पंच-सरपंच के चुनाव हो रहे हैं। इसके चलते नामांकन प्रक्रिया और मतदान दिवस के बीच औसतन सप्ताह भर का अंतराल है। इससे कार्मिकों के लिए डाक मत पत्र की व्यवस्था के लिए पर्याप्त समय है, बावजूद निर्वाचन आयोग ने कोई गाइड लाइन जारी नहीं की है। हालांकि उसके पीछे व्यावहारिक समस्या बताई जा रही है। पंच-सरपंच के मतों की गणना संबंधित ग्राम पंचायत में ही होनी है। ऐसे में डाक मत पत्रों की छटनी करना तथा उसे संबंधित पंचायत तक पहुंचाने के लिए निर्वाचन विभाग को बड़ी संख्या में अतिरिक्त कार्मिकों की सेवाएं लेनी पड़ेगी। संभवतया इसी वजह से निर्वाचन विभाग ने प्रावधान नहीं किए।

इनका कहना. . .
पंच-सरपंच चुनाव में डाक मत की व्यवस्था व्यावहारिक तौर पर बहुत मुश्किल है। हालांकि इस बार नामांकन और मतदान के बीच समय है, लेकिन निर्वाचन विभाग की ओर से ऐसी कोई गाइड लाइन फिलहाल नहीं मिली है।
आलोक रंजन, जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलक्टर, डूंगरपुर

Vinay Sompura Bureau Incharge
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