scriptIN CG, the government placed a condition in front of the farmer | छत्तीसगढ़ में धान खरीदी से पहले सरकार ने किसानों के सामने रखी ऐसी शर्त, जानकर उड़े गए हैं लाखों अन्नदाताओं के होश | Patrika News

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी से पहले सरकार ने किसानों के सामने रखी ऐसी शर्त, जानकर उड़े गए हैं लाखों अन्नदाताओं के होश

समर्थन मूल्य पर बिक्री के लिए इस बार किसानों को 50 फीसदी धान खुद के बारदाने में देना होगा। इसके लिए किसानों को टोकन लेने के समय सहमति पत्र भरकर देना होगा।

दुर्ग

Published: November 29, 2021 02:00:46 pm

दुर्ग. समर्थन मूल्य पर बिक्री के लिए इस बार किसानों को 50 फीसदी धान खुद के बारदाने में देना होगा। इसके लिए किसानों को टोकन लेने के समय सहमति पत्र भरकर देना होगा। इस संबंध शासन की ओर से समितियों को निर्देश जारी किया गया है। इसके अलावा इस बार धान बेचने के लिए पांच के बजाए केवल तीन बार ही टोकन दिया जाएगा। समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदी एक दिसंबर से शुरू होगी। इसमें अब दो दिन ही शेष रह गया है। इस बीच बारदाना संकट से जूझ रही सरकार की ओर से समितियों के लिए खरीदी के लिए टोकन जारी करने के संबंध में नया निर्देश जारी किया गया है। इसके मुताबिक इस बार किसानों को बिक्री का कम से कम 50 फीसदी धान खुद के बारदानों में भरकर देना होगा। इसके लिए किसानों को टोकन जारी करने के समय ही समितियों में सहमति पत्र जमा कराना होगा। हालांकि अफसर इसे किसानों के लिए ऐच्छिक और बारदाना के संकट से निपटने किसानों को प्रेरित करने का प्रयास बता रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी से पहले सरकार ने किसानों के सामने रखी ऐसी शर्त, जानकर उड़े गए हैं लाखों अन्नदाताओं के होश
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी से पहले सरकार ने किसानों के सामने रखी ऐसी शर्त, जानकर उड़े गए हैं लाखों अन्नदाताओं के होश
रिस्क के मूड में नहीं सरकार
अफसरों के मुताबिक इस बार सरकार बारदाने की कमी के कारण खरीदी बीच में प्रभावित हो यह जोखिम नहीं लेना चाहती है। इसलिए पहले से ही किसानों को पुराने बारदाने का विकल्प दिया जा रहा है। पिछले साल बारदाना नहीं मिलने के कारण कई केंद्रों में धान खरीदी बंद करने की नौबत आ गई थी। यहां तक कि दूसरे उपयोग के प्लास्टिक बारदानों में भी खरीदी के बाद भी संकट बरकरार रहा।
30 लाख बारदानों की कमी
दुर्ग जिले में इस बार 41 लाख क्विंंटल से ज्यादा धान खरीदी की संभावना है। इन्हें खरीदने के लिए सरकार को कम से कम 1 करोड़ बारदानों की जरूरत होगी। अधिकारियों के मुताबिक इस बार केवल 30 लाख नए बारदाने केंद्र से मिले हैं। वहीं करीब 40 लाख बारदाने पीडीएस और मिलर्स से प्राप्त हुए हैं। ऐसे में अभी भी 30 लाख बारदानों की कमी है। सरकार केंद्र पर आश्रित रहने के बजाए किसानों से इस कमी की भरपाई करना चाहती है।
पिछली बार का नहीं मिला किसानों को पैसा
पिछली बार भी संकट होने पर इसी तरह किसानों से पुराने बारदाने लेकर धान की खरीदी की गई थी। तब किसानों को इसके एवज में राशि भुगतान करने का भरोसा दिलाया गया था। इस पर भरोसा कर किसानों ने खुद के सारे बारदाने केंद्रों को दे दिए, लेकिन इन बारदानों का भुगतान अब तक किसानों को नहीं हो पाया है। ऐसे में किसान बारदाना कहां से लाएंगे और भुगतान कब मिलेगा इसे लेकर सवाल स्वाभाविक है।
फिर बढेगी बारदानों की कालाबाजारी
पिछले साल धान खरीदी के दौरान बारदानों की जबरदस्त कालाबाजारी हुई। बारदाना संकट के बाद इसके विक्रेताओं ने सारे बारदाने दबा लिए और किसानों को ज्यादा कीमत पर बेचना शुरू कर दिया। जिसके कारण पुराने व फटे बारदाने भी 35 से 50 रुपए प्रति नग तक बेचे गए। जबकि यहीं बारदाने 5 से 15 रुपए तक बाजार में सामान्य दिनों में उपलब्ध हो जाते हैं।
सोमवार से बंटेगा केंद्रों में टोकन
अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक धान खरीदी का सॉफ्टवेयर समितियों को उपलब्ध करा दिया गया है। रविवार को इसका ट्रायल रन भी कराया गया। इसमें सब कुछ ठीकठाक रहा। अब सोमवार से केंद्रों में सॉफ्टवेयर से टोकन वितरण किया जाएगा। हालांकि कुछ सेंटरों में सहूलियत के लिए पहले ही मेनुअल टोकन वितरण शुरू कर दिया गया है।

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