पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में पलीता, टेंडर में हेराफेरी कर 3.64 करोड़ का चूना लगाने की थी तैयारी, 4 इंजीनियर को नोटिस

पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में पलीता, टेंडर में हेराफेरी कर 3.64 करोड़ का चूना लगाने की थी तैयारी, 4 इंजीनियर को नोटिस

Hemant Kapoor | Publish: Jul, 11 2019 10:37:28 PM (IST) Durg, Chhattisgarh, India

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट पीएम आवास के निर्माण में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। निर्माण से जुड़े नगर निगम केइंजीनियरों में प्रोजेक्ट में मकानों के साथ बिजली-पानी जैसी जरूरी सुविधाओं का प्रावधान होने के बाद भी टेंडर में हेराफेरी कर ठेकेदार से अनुबंध नहीं कराया।

दुर्ग. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट पीएम आवास के निर्माण में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। निर्माण से जुड़े नगर निगम के इंजीनियरों में प्रोजेक्ट में मकानों के साथ बिजली-पानी जैसी जरूरी सुविधाओं का प्रावधान होने के बाद भी टेंडर में हेराफेरी कर ठेकेदार से अनुबंध नहीं कराया। इस तरह ठेकेदार को 3.64 करोड़ का फायदा पहुंचाकर सरकार को चूना लगाने की तैयारी थी। निगम कमिश्नर सुनील अग्रहरि ने प्रोजेक्ट से जुड़ी फाइलों की जांच की तब इसका खुलासा हुआ। इस पर ईई सहित 4 इंजीनियरों को नोटिस जारी किया है। नोटिस का जवाब नहीं देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।


यह है पूरा मामला
योजना के तहत बोरसी हनोदा रोड पर बिल्डरों द्वारा इडब्ल्यूएस योजना के तहत छोड़ी गई जमीन पर 486 मकान बनाया जा रहा है। इसमें 24.83 करोड़ खर्च की जा रही है। यहां 420 आवास का काम पूरा हो गया है, लेकिन बिजली व पानी सप्लाई की व्यवस्था नहीं है। ठेकेदार बीएसबीके भिलाई ने अनुबंध में बिजली-पानी का जिक्र नहीं होने हवाला देकर काम से मना कर दिया था।


ऐसे खुला मामला
बोरसी के 420 में से 88 आवासों का आवंटन एक साल पहले जोगी नगर के हितग्राहियों को किया गया है, लेकिन बिजली-पानी की सुविधा नहीं होने के कारण हितग्राहियों ने शिफ्टिंग से इंकार कर दिया था। संदेह होने पर कमिश्नर सुनील अग्रहरि ने प्रोजेक्ट के दस्तावेज की जांच कराई। इसमें बिजली पानी सहित तमाम व्यवस्थाएं प्रोजेक्ट में शामिल होने का खुलासा हुआ।


इन्हें थमाया नोटिस
पीएम आवास का काम ईई एके दत्ता की अगुवाई में प्रभारी ईई राजेश पांडेय, इंजीनियर आरके जैन और भीमराव देख रहे थे। निर्माण के लिए टेंडर जारी करने से लेकर देखरेख का पूरा काम इन्हीं के द्वारा किया गया, लेकिन इन अफसरों ने प्रोजेक्ट के प्रावधानों को नजरअंदाज कर न सिर्फ टेंडर जारी किया, बल्कि ठेकेदार से अनुबंध भी करा लिया।


आर्किटेक्ट के भुगतान में भी गड़बड़ी
जांच में आवासों के डीपीआर में स्थानीय तकनीकी सलाहकार की भूमिका नहीं होने के बाद भी भुगतान का खुलासा हुआ है। कमिश्नर ने बताया कि प्रोजेक्ट एनआईटी द्वारा तैयार किया गया है, वहीं निविदा की कार्यवाही विभाग द्वारा की गई है। जिसमें तकनीकी सलाहकार की कोई भूमिका नहीं है। जबकि स्थानीय स्तर पर तकनीकी सलाह बताकर भुगतान कर दिया गया है।

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