कोरोना वायरस की वजह से देश के हर आदमी को 6.50 लाख रुपए का नुकसान!

  • बार्कलेज बैंक का अनुमान लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था को 120 अरब डॉलर का नुकसान
  • मंगलवार को पीएम मोदी ने देश में 21 दिनों के लॉकडाउन का दे दिया है आदेश

नई दिल्ली। पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया गया है। मंगलवार को पीएम मोदी ने रात को आठ बजे इस बात का ऐलान कर दिया है। बार्कलेज बैंक की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस और उसकी वजह से हुए लॉकडाउन की वजह से देश को 120 अरब डॉलर यानी 9.15 लाख करोड़ के नुकसान का अनुमान है। अगर इस नुकसान को देश की प्रति व्यक्ति के हिसाब से देखा जा तो 6.58 लाख रुपए देखने को मिल रहा है। आइए आपको भी बताते हैं कि बार्कलेज बैंक की ओर से किस तरह का अनुमान लगाया गया है।

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120 अरब डॉलर का नुकसान
रिपोर्ट के अनुसार देश में हुए लॉकडाउन की वजह से इंडियन इकोनॉमी को करीब 120 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। यह नुकसान कुल जीडीपी का 4 फीसदी है। इस नुकसान में 90 अरब डॉलर का नुकसान सिर्फ लॉकडाउन का समय बढ़ाने की वजह से होगा। इसका असर जीडीपी की रफ्तार भी पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष के दौरान इंडियन इकोनॉमी की रफ्तार 2.5 फीसदी रह सकती है। इससे पहले इस रफ्तार का अनुमान 4.5 फीसदी लगाया गया था। वित्तीय वर्ष 2020-21 के विकास के अनुमान को 5.2 फीसदी से 3.5 फीसदी कर दिया गया है। के लिए विकास दर के पूर्वानुमान को 5.2 फीसदी से घटा कर 3.5 फीसदी कर दिया है।

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6.58 लाख रुपए प्रति व्यक्ति का नुकसान
वहीं अगर इस समग्र नुकसान को देश की आबादी के हिसाब देखा जाए तो 6 लाख रुपए प्रति व्यक्ति से ज्यादा बैठ रहा है। जनवरी 2020 में देश की आबादी 1387297452 को आधार माना जाए तो 120 अरब डॉलर यानी भारतीय रुपए के हिसाब से 9.15 लाख करोड़ रुपए बन रहा है। देश की कुल आबादी में इसे बराबर बांट दिया जाए तो रकम 6.58 लाख रुपए प्रति व्यक्ति बन रही है। इसका मतलब ये हुआ कि कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन की वजह देश हरेक आदमी को 6.58 लाख रुपए नुकसान होगा।

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देश की प्रति व्यक्ति आय
अगर बात देश की प्रति व्यक्ति आय की करें तो सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019-20 में 1,35,050 प्रति व्यक्ति है। यानी जो लॉकडाउन के दौरान जिस नुकसान का अंदाजा लगाया गया है और प्रति व्यक्ति पर लागू किया गया है, वो देश के हर व्यक्ति की सालाना कमाई से करीब 5 गुना ज्यादा है। अब अंदाजा लगा सकते हैं कि कमाई से ज्यादा नुकसान होगा जो देश पर कितना बोझ बढ़ जाएगा।

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Saurabh Sharma Desk/Reporting
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