
coronavirus lockdown grocery apps suspend orders milk supply effected
नई दिल्ली। आईटी या किसी मल्टी नेशनल फर्म में करने वाले जो ग्रूफर्स, फ्लिपकार्ट, अमेजन साइट से झट से ऑर्डर कर फट से सामान मंगाते थे, वो अब देश में हुए लॉकडाउन की वजह से पड़ोस की दुकान में आटा, दाल, चावल, खाने का तेल आदि खरीदते हुए दिखाई दे रहे हैं। जी हां, इस लॉकडाउन की वजह से घर के जरूरी सामान की उपलब्धता इन ई-कॉमर्स साइट्स काफी कम हो गई है। अगर है भी डिलीवरी समय पर नहीं है। ऐसे में इन एप्स के मुकाबले लोगों के लिए पड़ोस की दुकान वरदान से कम नहीं है। जहां पर सारा सामान फटाफट मिल रहा है। वास्तव में लोकल सर्किल की ओर से किए गए सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है। लोकल सर्वे में देश के 164 से ज्यादा जिलो के 16000 अधिक लोगों को शामिल कराया और रिजल्ट आपके सामने है।
दो भागों में कराया गयास सर्वे
लोकल सर्किल द्वारा यह सर्वे दो हिस्सों में किया गया है। पहला सर्वे 20 से 22 मार्च के बीच किया गया। दूसरा सर्वे 23 से 24 मार्च के बीच हुआ। पहले भाग की बात करें तो ई-कॉमर्स एप पर आटा, दाल, चावल, नमक जैसे सामान 35 फीसदी लोगों को नहीं मिले। जबकि पड़ोस की दुकान पर जाने वाले 17 फीसदी लोगों को इन सामान से महरूम रहना पड़ा। अब बात सर्वे के दूसरे भाग की बात करें तो ईकॉमर्स एप पर 79 फीसदी लोगों को घर का जरूरी सामान नहीं मिला, जबकि पड़ोस की दुकान से सिर्फ 32 फीसदी लोगों को यह सामान नहीं मिला। जबकि बाकी लोगों को सामान आराम से मिला।
होम डिलीवरी समय पर नहीं
सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार ऐप के जरिए सामान ऑर्डर करने के बाद या तो समय पर मिल नहीं रहा। अगर आ भी रहा है तो पूरा नहीं है। आंकड़ों के अनुसार बीते दो दिनों में ऐप से सिर्फ 21 फीसदी लोगों को सामान समय पर मिला। जबकि 27 फीसदी लोगों को सामान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। 21 फीसदी लोगों को सामान ही नहीं पूरा नहीं मिला यानी जितना और जो सामान ऑर्डर किया गया था, या तो उनकी क्वांटिटी कम थी या फिर वो सामान ही नहीं था। वहीं 17 फीसदी लोगों का ऑर्डर ही कैंसल हो गया। अब आप समझ सकते हैं कि ऑनलाइन ऑर्डर किस तरह का हाल हो गया है।
मोहल्ले की दुकान में मिल रहा सभी सामान
लोकल सर्किल के सर्वे के अनुसार 38 फीसदी लोगों का कहना है कि मोहल्ले की दुकाने पर रोजमर्रा का सामान आसानी से मिल रहा है। जबकि 30 फीसदी लोगों का कहना है कि कुछ सामानों को छोड़ दिया जाए तो सभी सामान मौजूद है। 12 फीसदी के अनुसार दुकान पर कुछ ही सामान मिला। वहीं 15 फीसदी को अधिकतर सामान नहीं मिला। 5 फीसदी लोगों का कहना है कि उन्हें जरूरत का कोई भी सामान नहीं मिल पाया।
Updated on:
25 Mar 2020 12:54 pm
Published on:
25 Mar 2020 12:52 pm
