आईएमएफ के दरवाजे फटेहाल पहुंचा पाकिस्तान,राहत पैकेज के लिए चीनी कर्जों की डीटेल शेयर करने को तैयार

आईएमएफ के दरवाजे फटेहाल पहुंचा पाकिस्तान,राहत पैकेज के लिए चीनी कर्जों की डीटेल शेयर करने को तैयार

Manish Ranjan | Publish: Oct, 15 2018 09:30:19 AM (IST) | Updated: Oct, 15 2018 09:30:20 AM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

पाकिस्तान की आर्थिक तंगहाली उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास ले गई है। बुरी तरह कर्ज के जाल में फंसे पाकिस्तान ने आर्थिक संकट टालने के लिए आईएमएफ की सारी शर्तें मंजूर कर ली है।

नई दिल्ली। पाकिस्तान की आर्थिक तंगहाली उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास ले गई है। बुरी तरह कर्ज के जाल में फंसे पाकिस्तान ने आर्थिक संकट टालने के लिए आईएमएफ की सारी शर्तें मंजूर कर ली है। पाकिस्तान आईएमएफ को चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) से जुड़े सारे कर्जों के बारे में बताने के लिए तैयार है।

नौ

चीनी कर्जों का खुलासा करेगा पाक

पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर का कहना है कि उनका देश आईएमएफ के साथ चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) से जुड़े कर्जों के डीटेल को शेयर करने के लिए तैयार है। साथ ही असद उमर ने अमरीका के उस बयान को भी खरिज कर दिया जिसमें अमरीका ने कहा था कि पाकिस्तान की हालिया खराब आर्थिक हालत चीन से लिए गए कर्ज की वजह से हुई है। असद उमर का कहना है कि चीन किसी भी तरह से पाक की हालत का जिम्मेदार नहीं है।

 

9 बिलियन डॉलर के कर्ज में डूबा पाक

उमर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आईएमएफ से कर्ज लेने का फैसला उसने मित्र देशों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। उमर ने यह भी जानकारी दी कि आईएमएफ की एक टीम 7 नवंबर को पाकिस्तान आने वाली है जो बेल आउट पैकेज को लेकर बातचीत करेगी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की चालू वित्त वर्ष में 9 बिलियन डॉलर का कर्ज है, यह पूरी रकम आईएमएफ से नहीं मिलेगी।

 

13वीं बार आईएमएफ से कर्ज लेगा पाक

असद उमर का यह भी कहना है कि पाक की सरकार किसी भी स्थिति में देश के हित के साथ समझौता नहीं करेगी। अगर आईएमएफ की कंडीशन ऐसी होंगी, जिस से देश की सुरक्षा पर असर पड़े तो पाकिस्तान सरकार आईएमएफ से मिलने वाले फायदे को नकार देगी। ऐसे में पाकिस्तान की इन बातों से ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान चीनी कर्ज के बारे में पूरी जानकारी नहीं देना चाह रहा है। बता दें कि 1988 के बाद पाकिस्तान 13वीं बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से आर्थिक मदद चाह रहा है।

 

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