scriptSC said, not give interest exemption is more harmful in moratorium | Supreme Court ने कहा, Loan Moratorium Period में ब्याज छूट ना देना है ज्यादा हानिकारक | Patrika News

Supreme Court ने कहा, Loan Moratorium Period में ब्याज छूट ना देना है ज्यादा हानिकारक

  • Interest Rate में छूट पर Supreme Court 12 जून को करेगा अगली सुनवाई
  • Loan Interest Rate माफी पर कोर्ट ने अब Finance Ministry से मांगा जवाब

नई दिल्ली

Updated: June 04, 2020 07:05:34 pm

नई दिल्ली। कोरोना वायरस लॉकडाउन ( Coronavirus Lockdown ) काल में आरबीआई ( rbi ) द्वारा दिया गया 6 महीने का लोन मोराटोरियम ( Loan Moratorium ) के दौरान ब्याज छूट के मामले ने तुल पकड़ लिया है। आरबीआई हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) ने कहा है कि आर्थिक पहलू जनता की सेहत से ऊपर नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया है कि लोन मोराटोरियम पीरियड ( Loan Moratorium Period ) में ब्याज छूट न देना ज्यादा हानिकारक है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 12 जून को होगी।

Supreme Court
SC said, not give interest exemption is more harmful in moratorium

जनता की सेहत, आर्थिक सेहत से ज्यादा जरूरी
अब इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मंत्रालय की ओर से भी जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार बैंकों का ब्याज आम जनता की सेहत से ज्यादा जरूरी नहीं है। बैंकों को संकट के समय ब्याज और ब्याज के ऊपर ब्याज नहीं देना चाहिए। इससे पहले आरबीआई की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में कहा था कि अब ब्याज को माफ कर दिया तो बैंकों को 2 लाख करोड़ रुपए का नुसान होगा। जिसमें एनबीएफसी के आंकड़े को जोड़ा नहीं नहीं गया है। सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मंत्रालय से 12 जून तक जवाब दाखिल करने को कहा है।

नहीं हो सकता है ब्याज माफ
इससे पहले आरबीआई मो लोन मोराटोरियम पीरियड 3 से बढ़ाकर 6 महीने कर दिया है। इस दौरान बैंक ब्याज भी ले रहे हैं। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ले आरबीआई से जवाब मांगा था। जिस पर आरबीआई ने ब्याज माफ ना होने की बात कही थी। आरबीआई ने कहा था कि इससे बैंकों को 2 लाख करोड़ रुपए का घाटा होगा। अब इस पूरे मामले में वित्त मंत्रालय की ओर से जवाब मांगा गया है। मंत्रालय के अनुसार इस मामले में चर्चा चल रही है। सुप्रीम कोर्ट को पूरी जाानकारी दी जाएगी।

मंत्रालय में बना है गंभीर विषय
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद से वित्त मंत्रालय में अब यह विषय ज्यादा गंभीर बन गया है। सूत्रों के अनुसार मंत्रालय में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी की समीक्षा होगी। जिसके बाद ही कोर्ट में पक्ष रखा जाएगा। जानकारी के अनुसार वित्त मंत्रालय में ब्याज पर ब्याज न वसूलने पर विचार किया गया था, लेकिन इस मामले कमें सहमति बन पाने के कारण मामले को बीच में ही छोडऩा पड़ा। सरकार के अनुसार एक को छूट देने के बाद दूसरा भी इस मामले में आवाज उठा सकता है। ऐसे में काफी मुश्किल हो जाएगा और बैंकों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।

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