हाई कोर्ट ने Assistant Teachers भर्ती मामले में मांगा जवाब, 95 शिक्षकों की नौकरी खतरे में

Jameel Khan

Publish: Sep, 12 2017 10:36:00 (IST)

Education
हाई कोर्ट ने Assistant Teachers भर्ती मामले में मांगा जवाब, 95 शिक्षकों की नौकरी खतरे में

इलाहाबाद HC ने प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में 72 हजार 825 Assistant Teachers की भर्ती मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

इलाहाबाद। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में 72 हजार 825 Assistant Teachers की भर्ती मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही गलत ढंग से नियुक्त विपक्षी चार अध्यापकों को नोटिस भी जारी की है। कोर्ट ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 30 नवम्बर, 2011 की भर्ती अभ्यर्थियों में से सामान्य के 70 फीसदी एवं आरक्षित वर्ग के 60 फीसदी अंक पाने वालों की नियुक्ति का आदेश दिया है, लेकिन सात दिसम्बर 2012 के विज्ञापन के 95 अभ्यर्थियों को भी सरकार ने नियुक्त कर लिया जिन्होंने 2011 की भर्ती में अर्जी ही नहीं दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने भी सात दिसम्बर 2012 की भर्ती पर विचार नहीं किया। ऐसे में 95 सहायक अध्यापकों को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। मामले की सुनवाई 19 सितम्बर को होगी। न्यायमूर्ति अरुण टंडन तथा न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की खण्डपीठ ने ऋषि श्रीवास्तव और नौ अन्य की अपील की सुनवाई करते हुए मंगलवार को यह आदेश दिया है। अपील पर अधिवक्ता प्रभाकर अवस्थी का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार बनाम शिवकुमार पाठक एवं अन्य केस पर अन्तरिम आदेश से 14 हजार सहायक अध्यापकों की नियुक्ति की गई है जिसमें से 95 नियुक्त अध्यापकों ने 2011 की भर्ती में आवेदन ही नहीं भरा था।

25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने अन्तिम फैसले में केवल 2011 की भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों की नियुक्ति का आदेश दिया है, जबकि अधिवक्ता का कहना था कि सात दिसम्बर 12 की भर्ती को अन्तरिम आदेश से शामिल किया गया। कोर्ट ने उन सभी को नियुक्त करने को कहा था जिन्होंने याचिका दाखिल की थी। इसी वजह से 2012 की भर्ती के अभ्यर्थियों को सहायक अध्यापक नियुक्त किया गया है। न्यायालय ने ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि 2012 की भर्ती पर विचार नहीं किया है।

 

उप्र सरकार Shiksha Mitra की उपेक्षा कर रही : मायावती
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने Shiksha Mitra के साथ प्रदेश सरकार के रवैये की निंदा की है। इसके साथ ही मायावती ने सरकार पर कांशीराम जी ग्रीन इको गार्डेन की अनदेखी व उसकी उपेक्षा करने का भी आरोप लगाया है।

मायावती ने मंगलवार को जारी बयान में कहा, शिक्षामित्र राज्य सरकार से न्याय व सहारा पाने के लिए लगातार आंदोलनरत हैं, लेकिन भाजपा सरकार सही मायने में उनकी सुध लेने को तैयार नहीं दिख रही है। शिक्षामित्रों का वेतन कम करके मात्र 10,000 रुपये की मासिक पर सीमित करके उनको शिक्षण कार्य करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, सरकार इन पर लाठी-डंडे भी बरसा रही है, जो न्यायोचित नहीं है। भाजपा सरकार को वास्तव में शिक्षामित्रों के प्रति सकारात्मक रुख अपनाकर ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिससे उनकी नौकरी सलामत रहे और वे दिल-जान से वापस शिक्षण के काम में लग जाएं।

इको गार्डेन की अनदेखी पर मायावती ने कहा, इको गार्डेन जनहित का सार्वजनिक पार्क है जो राजधानी लखनऊ की शोभा है तथा दलितों व पिछड़ो में जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के आदर-सम्मान से जुड़े होने के कारण इन स्थलों से करोड़ों लोगों की भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को इनकी भावनाओं का अवश्य ही ख्याल रखना चाहिए और इनकी उपेक्षा नहीं करके, इनकी सुरक्षा व संरक्षण पर समुचित ध्यान देना चाहिए।

 

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