23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आजादी के 75 साल तक ये गांव था अँधेरे में, पहली बार दिवाली पर आई बिजली

This Diwali in Tulai Ka Nagla, a remote village in UP to celebrate 'light' for first time since Indepenendence; उत्तर प्रदेश के एटा जिले में तुलाई का नागला नाम के गांव में आजादी के 75 साल बाद पहली बार बिजली पहुंची है।

2 min read
Google source verification

एटा

image

Nadeem Khan

Oct 25, 2022

electric.jpg

इस दिवाली यूपी के एटा जिले में रिमोट गांव तुलाई का नागला में बिजली पहुंची। देश के 75 साल आजाद होने के बाद भी तुलाई गांव के लोग अंधेरे में रह रहे थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया के रिपोर्ट के मुताबिक बिजली विभाग ने तुलाई गांव में ट्रांसमिशन पोल और बिजली की सप्लाई लाइन बिछा दी है। इसके लिए एक ट्रांसफॉर्मर भी लगाया गया है।

दशकों से अंधेरे में दिवाली मनाने को मजबूर ग्रामवासियों की जिंदगी उजाले में आई है। इस पर रविवार को गांव वालों ने खुशियां जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें अब कभी काली दिवाली नहीं देखनी पड़ेगी।

तुलाई का नागला गांव के रहने वाले लगभग 100 साल के बुजुर्ग कहते हैं। यह अविश्वसनीय है, पिछले कई दशकों से बिजली विभाग में क्षेत्रिय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के दफ्तर का चक्कर लगा रहे थे। लेकिन अब गांव की सड़कें रोशन होंगी।

राजाराम कहते हैं कि हमारे पास खुशी जाहिर करने के लिए शब्द नहीं हैं। अपने जीवनकाल में गांव को रोशन होते देख लिया।

मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा ने अधिकारियों को गांव में बिजली की उपलब्धता को लेकर निर्देश दिया था।

अलीगंज के विधायक सत्यपाल सिंह ने दिए 9.9 लाख रुपए
गांव में बिजली पहुंचाने को लेकर विधानसभा चुनाव के बाद अलीगंज के विधायक सत्यपाल सिंह ने 9.9 लाख रुपए दिए थे। जिससे बुनियादी काम पूरे किए गए।

22 पोल पर 350 मीटर लंबी बिजली लाइन बिछाई
विद्दुत विभाग के एसडीओ सोनू कुमार ने कहा कि 63 केवीए क्षमता का एक ट्रांसफार्मर और 22 बिजली पोल लगाए गए हैं। विद्दुतिकरण के लिए 350 मीटर लंबी बिजली लाइन बिछाई गई है।

शनिवार को विधायक सत्यपाल सिंह ने अलीगंज अनुमंडल के तुलाई गांव में बिजली का उद्घाटन किया। इसमें 300 की आबादी वाले इस गांव के 30 घर बिना बल्ब के पाए गए।

गांव के लोगों में खुशियों की लहर है, अब उन्हें मोबाइल चार्ज के लिए पड़ोस के गांव रामपुर नहीं जाना पड़ेगा। बिना मोमबत्ती के बच्चे पढ़ सकेंगे।