ब्रिटिश सांसद ने सरकार से की कश्मीर विवाद पर मध्यस्थता की मांग, बोले- यह हमारा दायित्व है

  • केंद्र की मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया है
  • ब्रिटिश सांसद इवान लेविस ने कहा कि कश्मीर विवाद का समाधान करना ब्रिटिश सरकार का दायित्व है

By: Anil Kumar

Updated: 14 Aug 2019, 08:38 AM IST

लंदन। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद से पूरी दुनिया का ध्यान कश्मीर पर केंद्रित हो गया है। पाकिस्तान दहाड़े मार कर पूरी दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा है और आग्रह कर रहा है कि भारत के खिलाफ एक्शन लिया जाए। लेकिन कोई भी देश पाकिस्तान को भाव नहीं दे रहा है।

हालांकि एक ऐसी खबर सामने आई है जो भारत को परेशानी में डाल सकता है। दरअसल, ब्रिटेन की संसद के सदस्य इवान लेविस ने ब्रिटेन सरकार से आग्रह किया है कि वह कश्मीर विवाद पर भारत व पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करें।

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इवान ने कहा कि कश्मीर विवाद ब्रिटेन के लिए 'एक ऐतिहासिक दायित्व' है। बता दें कि भारत की ओर से बीते सप्ताह सोमवार को जम्मू एवं कश्मीर के विशेष दर्जे को निष्प्रभावी किए जाने के बाद भारत व पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ रहा है।

मालूम हो कि इससे पहले कश्मीर विवाद पर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थता की पेशकश की थी, हालांकि भारत ने ट्रंप के बयान को खारिज कर दिया था और साफ कर दिया था कि कश्मीर विवाद भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मामला है। हम दोनोें मिलकर इसका समाधान बातचीत से निकालेंगे।

जम्मू-कश्मीर

'कश्मीर विवाद का समाधान करना हमारा दायित्व है'

रेडियो पाकिस्तान की मंगलवार की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक राब को लिखे एक पत्र में लेविस ने कहा है कि कश्मीर का क्षेत्र 70 सालों से ज्यादा समय से क्षेत्रीय संघर्ष व हिंसा का केंद्र रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि हमारे नव-नियुक्त विदेश मंत्री के रूप में, आप निश्चित रूप से यह समझेंगे कि ब्रिटिश सरकार का ऐतिहासिक दायित्व है कि वह पाकिस्तान और भारत के बीच मध्यस्थता करने में मदद करे।

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इवान लेविस ने कहा 'आप इस बात को जानते ही होंगे कि ब्रिटिश उपनिवेशी प्रशासन के उपमहाद्वीप से जाने के बाद कश्मीर में तनाव पैदा हुआ है। कश्मीर के लोगों को नए राष्ट्र भारत के अधिकार क्षेत्र में छोड़ दिया गया था।

रिपोर्ट में कहा गया कि अब भारत सरकार ने जो भी कार्रवाई कश्मीर में की है उसकी कड़े शब्दों में निंदा करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि यह 'हमारा नैतिक दायित्व है कि बोलें और कश्मीर में बढ़ते तनाव पर एक शांतिपूर्ण प्रस्ताव की मांग करें।'

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