स्पेन चुनाव में मजबूत है दक्षिणपंथ का दावा, यूरोप की राजनीति पर होगा दूरगामी असर

  • 28 अप्रैल को आम चुनाव के लिए स्पेन में डाले जाएंगे वोट।
  • राजनीतिक अस्थिरता और अलगाववाद से जूझ रहा है स्पेन।
  • स्पेन की राजनीति में दक्षिणपंथ का दिख रहा है प्रभाव।

Anil Kumar

April, 2807:02 AM

नई दिल्ली। स्पेन ( Spain ) में 28 अप्रैल को आम चुनाव के लिए मतदान होंगे। सभी राजनीतिक दलों ने इस चुनाव में जीत हासिल कर सत्ता में काबिज होने के लिए जोर-शोर से प्रचार किया। अब चुनाव परिणाम आने के बाद ही यह साफ होगा कि कौन सी पार्टी सत्ता में काबिज होगी। बहरहाल उससे पहले जो सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है, वह स्पेन चुनाव में मजबूत दक्षिणपंथ ( Right-Wing ) का दावा है। तो क्या इस बार स्पेन में दक्षिणपंथी विचारधारा का वर्चस्व होगा और यदि हां तो यूरोप की राजनीति में इसका कितना असर होगा?

अमरीकी सीमा पर दिखा दिल को छू लेने वाला नजारा, भटकता मिला 3 साल का बच्चा

यूरोपीय देशों में बढ़ता दक्षिणपंथ प्रभाव

पूरे विश्व में यदि देखें तो दक्षिणपंथ का प्रभाव धीरे-धीरे लगातार बढ़ता जा रहा है। दक्षिणपंथ विचारधार रखने वाले दलों के नेतृत्व में सरकारें भी बनी है और मौजूदा समय में सरकार चल रही है। भारत, फ्रांस, अमरीका, जापान, इजरायल, रूस, जर्मनी, स्वीट्जरलैंड, पोलेंड आदि कई देश हैं जहां दक्षिणपंथ विचारधारा वाले पार्टियों की सरकार है। इसी तरह से कई ऐसे यूरोपीय देश भी हैं जहां पर बीते एक दशक से दक्षिणपंथी पार्टियों का वर्चस्व बढ़ा है। यूरोप के 11 देशों के 14 ऐसी पार्टियां हैं, जो दक्षिणपंथी हैं और उनका प्रभाव काफी बढ़ गया है। इन पार्टियों का वर्चस्व ज्यादातर युवाओं और पुरुषों पर है। इसके अलावे दक्षिणपंथी पार्टिंयों का प्रभाव फ्रांस, इटली और ऑस्ट्रिया के अपने पारंपरिक गढ़ से बाहर भी फैल गया है और अब उदारवादी नीदरलैंड्स और स्केंडिनेवियाई देशों में भी उसका प्रभाव दिखने लगा है। दक्षिणपंथी वर्चस्व का बढ़ने का एक कारण राष्ट्रवाद और सासंकृतिक पहचान है। लोगों को यह महसूस होने लगा या फिर उसे यह महसूस कराया जाने लगा कि वे अपनी सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान को खो रहे हैं। ऐसे में क्या यह माना जा सकता है कि धीरे-धीरे यूरोप की राजनीतिक चेतना में बदलाव आ रहा है? क्या यह समझा जा सकता है कि यूरोपीय राजनीति में इसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा? संभवत: हां, क्योंकि दक्षिणपंथी पार्टियां राष्ट्रवाद के प्रति खुद को समर्पित दिखाती हैं और इसका असर कहीं न कहीं देश की आवाम पर पड़ता है। साथ ही पड़ोसी देश पर भी इसका असर देखने को मिलता है।

 

Read the Latest World News on Patrika.com. पढ़ें सबसे पहले World News in Hindi पत्रिका डॉट कॉम पर. विश्व से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Follow करें Twitter पर.

Show More
Anil Kumar
और पढ़े
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned