डिजिटल एवं कैशलेश ट्रांजेक्शन नहीं कैश है लोगों की पहली पसंद

डिजिटल एवं कैशलेश ट्रांजेक्शन नहीं कैश है लोगों की पहली पसंद

Ashutosh Kumar Verma | Publish: Jul, 17 2018 05:53:52 PM (IST) | Updated: Jul, 18 2018 08:53:27 AM (IST) फाइनेंस

पीडब्ल्यूसी में वित्तीय सेवाओं के सहयोगी विवेक अय्यर ने बताया कि डिजिटल भुगतान बड़े शहरों में तो हो सकते हैं। लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों और गांवों में ऐसा अभी संभव नही है।

नई दिल्‍ली। मोदी सरकार ने नोटबंदी करने का एक कारण भारत की जनता को यह बताया था कि नोटबंदी से भारत को कैशलेस इकॉनमी के तौर पर विकसित करने में मदद मिलेगी। डिजिटल एवं कैशलेश ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए पीएम मोदी ने नोटबंदी तो कर दी लेकिन इसका ज्यादा कुछ फायदा होता दिख नहीं रहा हैं। क्योंकि आज भी अगर लोगों को पेंमेंट करनी होती है या फिर पैसों की जरूरत आन पड़ती है तो लोग सबसे पहले एटीएम की ओर ही भागते हैं। नोटबंदी के बाद डिजिटल एवं कैशलेश ट्रांजेक्शन को बढ़ावा तो मिला था पर एक बार फिर लोगों ने कैश का इस्तेमाल करना ज्यादा कर दिया है।


गांवों में कैशलेश ट्रांजेक्शन संभव नहीं
पीडब्ल्यूसी में वित्तीय सेवाओं के सहयोगी विवेक अय्यर ने ईटी को बताया कि डिजिटल भुगतान बड़े शहरों में तो हो सकते हैं। लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों और गांवों में ऐसा अभी संभव नही है। लोग अभी भी कैश पर ही निर्भर है और कैश का ही प्रयोग करना पंसद करते हैं। ऐसे में अगर एटीएम में कमी आई या फिर कैश में कमी हुई तो यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।


भारत को कैशलेस बनाना मुश्किल
अय्यर आगे कहते है की भारत अचानक एस्टोनिया की तरह नहीं बन सकता है, जहां सभी भुगतान डिजिटल हैं। अभी भी नकदी की मांग बहुत अधिक है और यदि बैंक एटीएम में पैसे नहीं डालेगा तो विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों के लोगों को कैश की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि ग्रामीण इलाकों के लोगों पूरी तरह से कैश पर निर्भर है। ऐसा भी हो सकता है की ग्रामीण लोग बैंकों में कैश जमा करना ही छोड़ दे।


आरबीआई को करना होगा बैंकों की मदद
एटीएम को लेकर अय्यर का यह भी कहना है की बैंको को एटीएम को मजबूत करने और लगाने में भारतीय रिजर्व बैंक के समर्थन की जरूरत हैं। क्योंकी भारत की लोग कैश पर बेहद ही निर्भर है ऐसे में आरबीआई को बैंको को एटीएम लगाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इतना ही नहीं एटीएम को लगाने में जो लागत लगती हैं आरबीआई को उसमें भी सहयोग करना चाहिए। ताकि बैंको पर ज्यादा बोझ न आ सकें।


एटीएम और कैश पर निर्भर लोग
जिस तरह से लोग एटीएम और कैश पर निर्भर है भारत का तेजी से कैशलेश ट्रांजेक्शन की ओग बढ़ पाना तो मुश्किल है। अगर लोग डिजिटल ट्रांजेक्शन करना शुरू कर दे तो बैंको को एटीएम को बनाने में जो लागत लगती हैं उसमें तकरीबन 50% अधिक का फायदा होगा। क्योंकि अगर लोग डिजिटल पेंमेंट करेगे तो लोगों को कैश और एटीएम की जरुरत कम पड़ेगी। जिससे बैंको को कम एटीएम लगाने पड़ेगे। जिससे बैंक भी डिजिटल का तरफ बढ़ सकेगे।


पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट
पीडब्ल्यूसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि नवंबर 2016 में एटीएम ट्रांजेक्शन 0.76% था। जो की महीने-दर-महीने गिर गया रहा है। प्रति माह 3.3% की गिरावट दर्ज की जा रही है। Demonetisation से पहले, एटीएम ट्रांजेक्शन 1.16% और 1.04% था। लोगों को कैशलेश ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित तो किया गया पर ऐसा हुआ नहीं। आज भी तकरीबन 85% लोग कैश ही इस्तेमाल करते हैं।पीडब्ल्यूसी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान करने की संख्या 5.5% बढ़ी है, और इन कार्डों के माध्यम से भुगतान की गई राशि 4% है, जो एटीएम उपयोग के खिलाफ डिजिटल भुगतान को तेजी से अपनाने का संकेत देती है।

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