13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

क्या आप जानते हैं ट्रैक पर कैसे दौड़ती है भारतीय रेल, ड्राइवर नहीं बल्कि कोई और चलाता है ट्रेन

पत्रिका दिखाएगा रेल कंट्रोल रूम में कैसे होता है काम, कैसे ट्रैक पर कैसे दौड़ती है भारतीय रेल।

2 min read
Google source verification
Indian Railway

क्या आप जानते हैं ट्रेन को ड्राइवर नहीं बल्कि कोई और चलाता है, देखेंं वीडियो

फिरोजाबाद। अधिकतर लोगों ने ट्रेनों में सफर किया होगा लेकिन शायद ही लोगों को पता होगा कि ट्रेनों का संचालन कहां से होता है। उसकी स्पीड और एक पटरी से दूसरी पटरी पर ट्रेन कैसे पहुंच जाती है। बोगी के अंदर बैठे यात्रियों को तो बस ट्रेन चलती और खड़ी होती ही नजर आती है। स्टेशनों पर ट्रेनों का इंतजार कर रहे यात्रियों को भी ट्रेन के समय से आने का इंतजार रहता है लेकिन ट्रेन की लोकेशन कहां से पता चलती है। इसकी जानकारी आज हम आपको दे रहे हैं। वीडियो के जरिए समझिए ट्रैक पर कैसे दौड़ती है भारतीय रेल।

कंट्रोल रूम में दिखती है पूरी लोकेशन

ट्रेनों के संचालन के लिए रेलवे बोर्ड द्वारा कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। उत्तर मध्य रेलवे की ट्रेनों के संचालन हेतु इलाहाबाद और टूंडला में कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। इलाहाबाद से नई दिल्ली तक चलने वाली ट्रेनों की जानकारी इस कंट्रोल रूम के माध्यम से पूछताछ केन्द्र तक पहुंचाई जाती है। ताकि ट्रेनों के इंतजार में खड़े यात्रियों को परेशानी का सामना न करना पड़े। अधिकतर लोग समझते हैं कि ट्रेन को ड्राइवर चलाता है। वहीं उसकी गति सीमा निर्धारित करता है लेकिन यह पूरी बात सच नहीं है।

कंट्रोल रूम से पता चलती है ट्रेन की स्पीड

पटरियों पर चलने वाली ट्रेन कंट्रोल रूम में लगी एलईडी में स्पष्ट नजर आती है। पटरियों पर दौड़ने वाली सैकड़ों ट्रेनों के नाम, नंबर और उनकी गति सीमा एलईडी पर दिखाई देती है। कब कौन सी ट्रेन से कौन सा स्टेशन पार किया है और आगे आने वाला स्टेशन कौन सा है। इसकी जानकारी भी कंट्रोल रूम से पता चलती है। ट्रेनों के संचालन के लिए भले ही ड्राईवर को बिठाया जाता है लेकिन वास्तविक रूम में आॅटोमेटिक सिस्टम के जरिए ट्रेनों को जोड़ दिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया को कंट्रोलरूम के माध्यम से हैंडल किया जाता है।

समय भी दर्शाती है ट्रेन

ट्रेन कितनी देर में अगले स्टेशन पर पहुंच जाएगी। उसकी समय सीमा यहां तक कि सैकंड भी एलईडी में नजर आती है। कब कौन सी ट्रेन कौन से खंबा नंबर पर खड़ी रही। इसकी पूरी जानकारी भी कंट्रोल रूम के पास रहती है। इसी जानकारी के आधार पर गार्ड और ड्राईवर से गाड़ी रूकने की जानकारी ली जाती है। ट्रेन के ओवरशूट होने तक की पूरी जानकारी भी कंट्रोल रूम में काम करने वाले कर्मचारियों के पास होती है। सिग्नल ओवरशूट होने पर तत्काल विभागीय कार्रवाई भी अधिकारियों द्वारा की जाती है।