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लगातार हो रहा है रेत का अवैध उत्खनन, दो जिले का बार्डर बना माफियाओं के लिए वरदान

पैरी नदी में जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे पिछले लंबे समय से रेत माफियाओं द्वारा रेत का अवैध उत्खनन जारी है।
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गरियाबंद

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Deepak Sahu

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Updated: 7 Jun 2018, 6:13 PM IST

sand smuggling

लगातार हो रहा है रेत का अवैध उत्खनन, दो जिले का बार्डर बना माफियाओं के लिए वरदान

गरियाबंद. छत्तीसगढ़ के गरियाबंद क्षेत्र के में आने वाली पैरी नदी में जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे पिछले लंबे समय से रेत माफियाओं द्वारा रेत का अवैध उत्खनन जारी है। इसके संबंध में लगातार खबर प्रकाशित किए जाने के बाद भी इस अवैध कारोबार पर रोक नहीं लगी है। अधिकारी कुंभकरणीय निंद्रा में लीन है। धमतरी जिले के नाम पर आवंटित की गई रेत खदान का दोहन गरियाबंद और उसके आसपास के क्षत्रों में हो रहा है। खनन माफियाओं की खनिज विभाग से सांठगांठ के चलते महानदी पर 24 घंटे चेन मशीन से रेत उत्खनन किया जा रहा है।

कुछ दिनों पूर्व गरियाबंद नगर से लगभग 12 किमी दूरी पर स्थित पंटोरा के पास तहसीलदार और नायब तहसीलदार द्वारा तीन हाइवा और चैन माउंटेन मशीन की जब्ती कर बड़ी कार्यवाही की गई थी। कार्यवाही की राशि का भुगतान नहीं कर पाने के चलते चैन माउंटेन मशीन महीनेभर से वहीं खड़ी है। इस बड़ी कार्यवाही के बाद हालांकि रेत माफिया कुछ दिनों के लिए भूमिगत हो गए थे।

खनिज विभाग ने जिस क्षेत्र में कार्यवाही हुई थी, उस क्षेत्र से महज 100 मीटर के दायरे में एक और रेत खदान का परमिशन धमतरी जिले के नाम पर देकर उसे फिर से चालू कर दिया। अब गरियाबंद और धमतरी जिले का बार्डर होने के चलते स्थानीय अधिकारी कार्यवाही नहीं कर पाने की बात कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

वहीं दूसरी ओर धमतरी जिले के अंतिम चोर पर रेत खदान का संचालन करने वाले गरियाबंद के स्थानीय माफिया बेखौफ होकर 24 घंटे रेत उत्खनन कर रहे हैं। दिन-रात में लगभग 60 हाइवा में रेत भरकर उसकी कालाबाजारी गरियाबंद क्षेत्र में ही की जा रही है और जिसके चलते शासन को महज कुछ ही दिनों में लाखों रुपए का राजस्व घाटा हो चुका है।

बारिश काल के देखते हुए रेत माफिया बड़े पैमाने पर रेत उत्खनन कर स्टॉक रखने की भी तैयारी कर रखी है। 24 घंटे मशीन से रेत उत्खनन का काम जारी है। इसका खामियाजा सरकार को राजस्व घाटा के रूप में उठाना पड़ रहा है। वहीं ओवरलोड रेत का परिवहन भी किया जा रहा है, जिस पर कोई कार्यवाई नहीं की जा रही है।

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