सीएम के जिले में भ्रष्टाचार पर ये कैसा जीरो टाॅलरेंसः घोटालेबाजों को बचाने के लिए जांच रिपोर्ट की फाइल ही गायब

पीपीगंज क्षेत्र में लाइटिंग के नाम पर धन का बंदरबांट, जांच रिपोर्ट में खुलासा होने के बाद फाइल ही गायब

भ्रष्टाचार पर जीरो टाॅलरेंस का योगी सरकार का दावा मुख्यमंत्री के जिले में ही बेमानी साबित हो रहा। लूट में शामिल लोगों का प्रभाव इतना कि सरकारी आफिस से जांच रिपोर्ट की फाइल गायब है लेकिन जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। मामला पीपीगंज नगर पंचायत क्षेत्र में लगे स्ट्रीट लाइटों के टेंडर का है। मानकों पर ताक पर रखकर लाखों का वारान्यारा तो हुआ ही आरोपियों को बचाने के लिए जांच रिपोर्ट को ही आफिस से गायब कर दिया गया। मौजूं सवाल यह कि जब सरकारी आफिस से एक बड़े घोटालेे की फाइल गायब है तो इस बाबत कोई जिम्मेदार चोरी का एफआईआर क्यों नहीं दर्ज करा रहा।
पीपीगंज नगर पंचायत क्षेत्र में आने वाले गोरखपुर-सोनौली हाईवे पर राज्य वित्त आयोग की धनराशि से 2014-15 के सत्र में 32 लाख रुपये से अधिक का स्ट्रीट लाइटिंग का काम कराया गया था। इस काम में करीब 67 बिजली के पोल लगाए जाने के साथ साथ उन पर एलईडी लाइट लगानी थी। बाकायदा टेंडर के माध्यम से यह काम होना था। टेंडर तो कागजों में कराया गया लेकिन काम कराने में मानकों की धज्जियां उड़ा दी गई। विभागीय और ठेकेदार के मिलीभगत से धन का बंदरबांट कर लिया गया।
लोगों के धन के इस बंदरबांट की शिकायत बीते योगी सरकार बनने के बाद जिला से लेकर शासन स्तर तक की गई। आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत की गई। बताया गया कि पीपीगंज क्षेत्र में हाईवे पर लगे 67 बिजली के पोल में मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए धन का बंदरबांट किया गया है। बिना पोल लगाए, केबल बिछाए ही बैकडेट में ठेकदार को भुगतान भी दे दिया गया है। कुछ जगह जहां पोल लगे हैं वह भी केवल फर्जी बिल बाउचर के लिए किया गया है।
लेकिन जांच के नाम पर केवल लीपापोती होती रही। जांच को इतना लंबा खिंचा गया कि पिछला कार्यकाल समाप्त हो गया और चुनाव आ गया। इसी बीच जांच अधिकारी ने जांच तो कर दिया। जांच रिपोर्ट में आरोप अक्षरशः सही साबित हुआ लेकिन कार्रवाई होने के पहले की जांच रिपोर्ट इधर-उधर लटकाया जाता रहा। जबकि बताया जा रहा कि जांच अधिकारी मणिशंकर ने जांच रिपोर्ट एडीएम आफिस में सौंप दिया। लेकिन अब बताया जा रहा कि आरोपियों को बचाने के लिए जांच रिपोर्ट की फाइल ही गायब कर दी गई है।
इस बाबत नगर पंचायत अध्यक्ष गंगा जायसवाल का कहना है कि कार्यालय लिपिक और अधिशाषी अधिकारी से फाइल और जांच की रिपोर्ट मांगी गई लेकिन फाइल कार्यालय में न होने की बात कही जा रही है।
उधर, शिकायतकर्ता विमल कुमार जायसवाल का कहना है कि घोटालेबाजों को बचाने के लिए फाइल गायब किया गया है। मुख्यमंत्री के पोर्टल पर भी शिकायत किया जा चुका है लेकिन कागजों में ही शिकायतों का निस्तारण हो रहा। वह इस बार खुद सीएम से मिलकर इसकी शिकायत करेंगे।

यह है मामला

- नगर पंचायत पीपीगंज में गोरखपुर-सोनौली राजमार्ग पर 67 बिजली पोल लगाकर लाइटिंग की व्यवस्था करनी थी। इसके लिए 31.21 लाख रुपये का भुगतान किया गया।

- इस काम में मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार 170 किलो वजन वाले पोल की जगह महज 75 किलो के पोल लगाए गए।

- जांच रिपोर्ट में साबित हुआ कि 2627 रुपये की दर से हर पोल पर स्टे सेट लगाना था लेकिन ऐसा नही हुआ

- सौंपे गए रिपोर्ट के अनुसार न तो अंडरग्राउंड केबल बिछाया गया और न ही मानकों का हुआ पालन

- बिजली पोल को जमीन के अंदर 1.80 मीटर बोर करना था लेकिन जांच रिपोर्ट के अनुसार इसमें भी मानक का ध्यान नहीं रखा गया।

- इस काम में 1.83 किलोमीटर अंडरग्राउंड केबल बिछाने के लिए प्रति मीटर 278 रुपये की दर से भुगतान कर दिया गया लेकिन जांच रिपोर्ट के अनुसार एक मीटर भी काम नहीं हुआ।

- टेंडर के मुताबिक 18 रुपये मीटर की दर वाला तार लगाना था लेकिन जांच रिपोर्ट में सामने आया कि ओवरहेड लाइन के लिए लगाया गया तार बेहद घटिया किस्म का था।

- पोल को जमीन में बोर कर उसको जाम करने के लिए सीमेंट व कंक्रीट का इस्तेमाल किया जाना था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

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धीरेन्द्र विक्रमादित्य
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